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Tuesday, March 23, 2010

दो लाख लोगों की होती है-हर वर्ष किडनी फेल

नई दिल्ली(प्रैसवार्ता) देश में हाई-ब्लड प्रैशर, मूत्र में प्रोटीन या खून जाना, क्रिएटिनाईन और ब्लड यूरिया, नाईट्रोजन का स्तर सामान्य से अधिक और जी.एफ.आर 90 से कम होना, पेशाब में तकलीफ, आंखों के नीचे सूजन, हाथ-पैरों में सूजन, हाईपरटैंशन के शिकार ज्यादातर लोग किडनी डिसीज (सी.के.डी) का शिकार हो रहे हैं-ऐसे लोगों को किडनी की जांच करवा लेनी चाहिये। उपरोक्त बिमारियों के चलते, यदि धूम्रपान और दर्द निवारक दवाओं के आदी पचास वर्ष की आयु लांघते ही किडनी फेल जैसी बीमारी से प्रभावित होना साधारण बनता जाने लगा है। किडनी फेल रोग का उपचार महंगा होने के कारण करीब दो लाख लोग प्रतिवर्ष लोग इस रोग की चपेट में आ रहे हैं। दिल्ली के आसपास हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार 10 हजार लोग सी.के.डी से पीडि़त है। इस दृष्टि से देश में करीब 78 लाख से ज्यादा आबादी इस बीमारी से ग्रस्त मानी जा सकती है। सर्वेक्षण के मुताबिक 41 प्रतिशत डायबिटीज, 22 प्रतिशत हाईपरटैंशन, 16 प्रतिशत क्रानिक ग्लोमेरुने फ्राईटिसके शिकार लोगों की सी.के.डी का खतरा है। हाथ-पैरों या पीठ दर्द के लिए नियमित रूप से दर्द निवारक लेना भी सी.के.डी को निमंत्रण देता है।

एक से बढ़कर एक कारनामों में फंसता जा रहा है-अशोक श्योराण

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) हरियाणा पुलिस की एस.टी.एफ के प्रमुख अशोक श्योराण (अब निलंबित) के नित नये कारनामे सामने आ रहे हैं, मगर जांच को लेकर कई संदेह उत्पन्न हो रहे हैं। पानीपत पुलिस ने श्योराण का पांच दिन का पुलिस रिमांड अदालत से प्राप्त कर लिया है, मगर श्योराण का जांच में सहयोग न करना जांच दल के लिए एक कठिनाई बन रहा है। एस.एस.पी पानीपत राजेन्द्र सिंह गहलोत के अनुसार सत्यता सामने जरूर लाई जायेगी-भले ही नारको टैस्ट करवाना पड़े। ''प्रैसवार्ता" द्वारा प्राप्त की गई जानकारी के अनुसार श्योराण के सरकार के विपक्ष के कई राजनेताओं तक की पहुंच जांच प्रभावित कर रही है। 16 नवम्बर 2008 को बादड़ा (भिवानी) क्षेत्र से 5 करोड़ रुपये की हैरोइन की बरामदी में आधा दर्जन लोगों पर शिकंजा कसने वाले श्योराण पर यह भी आरोप लग रहा है कि डसने हैरोइन की जगह यूरिया पावडर की प्रयोगशाला जांच करवाई, जिसके चलते सभी कथित अपराधी जमानत पर रिहा कर दिये। श्योराण का सर्विस रिवालवर का गुम होना और उससे पुलिस अधिकारी राजबीर की हत्या का होना भी विवादित हो गया है।

रोटी के साथ लहसुन की चटनी भी भारी

श्री गंगानगर(प्रैसवार्ता) सब्जी व फलों की फुटकर कीमतों में आये अचानक उछाल ने जब सामान्य के होश उड़ा दिये हैं, वहीं खुदरा विक्रेताओं की मनमर्जी पर सरकार शिकंजा कसने में असफल दिखाई देती है। आलू जैसी सदाबार सब्जी का प्रयोग भी मुश्किल हो गया-वहीं अन्य सब्जियों के दाम सुनते ही कंपकंपी शुरू हो जाती थी। सब्जी विक्रेता पहले सब्जियों के दाम किलो में बताते थे, मगर एक पाव का भाव बताया जाता है। हरी सब्जियों के आसमान छू रहे दाम पर नजर दौड़ाने से लगता है कि सब्जी के स्थान पर चटनी से रोटी खाना भी मुश्किल हो गया, क्योंकि लहसुन 60 रुपये किलो बिक रही है। नमक-मिर्च में पानी डालकर रोटी खाना भी एक कठिनाई बनता जा रहा है, क्योंकि इनके दाम भी उछाला लिये हुए हैं। गंगानगर में सब्जियों की आवक कम होने के कारण बाहर से सब्जियों की आवक होती है, तो हाल में ही हुए माल भाड़े की बढ़ौत्तरी को इसका एक कारण माना जा रहा है।

घोड़ों के लिए विशेष पहचान रखता है-बेरी

झज्जर(प्रैसवार्ता) हरियाणा राज्य के जिला झज्जर के कस्बे बेरी में, जहां मां भीमेश्वरी देवी के दर लाखो श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचे रहे हैं, वहीं उत्तरी भारत में घोड़ों व खच्चरों के मेले में भी भारी भीड़ जुट रही है। सोमवार से शुरू हुए इस मेले में पहुंचे कई घोड़ों ने तो लग्जरी गाडिय़ों को भी पिछाड़ दिया है और 25 लाख रुपये तक घोड़े की कीमत लगाई जा रही है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी अनुसार कस्बा बेरी में चैत्र माह में खच्चरों तथा घोड़ों का मेला लगता है-जिसमें दूर-दूर से खच्चर व घोड़े बिक्री के लिए जाये जाते हैं। मेले में विशेष आकर्षण का केन्द्र बने कई घोड़ों की कीमत 3 लाख रुपये से 25 लाख रुपये मांगी जा रही है। वैसे आम नसल के घोड़े-घोड़ी 70 से 80 हजार के बीच बिक रहे हैं। मेले में हरियाणा के अतिरिक्त, पंजाब, दिल्ली, यू.पी., राजस्थान इत्यादि के अश्व व्यापारी खरीदो-फरोक्त कर रहे हैं।

महापाठ के रूप में मिलेगा हनुमंतलाल का आर्शीवाद

उज्जैन(प्रैसवार्ता) भारतीय संस्कृति के इतिहास में अनूठा द्वितीय अनुष्ठान रामनवमी के दिन पूरा होने जा रहा है। करोड़ों हनुमान भक्त रामनवमी के दिन, एक ही समय पर श्रीहनुमानचालीसा का महापाठ करेंगे। यह आयोजन सांय 7 से 8 के मध्य देश तथा विदेशों में एक साथ होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश गोयल ने बताया कि जीवन प्रबंधन समूह और महापाठ आयोजन समिति के तत्वावधान तथा प्रसिद्ध जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजयशंकर मेहता की प्रेरणा से होने जा रहे महाआयोजन की तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं। मुख्य कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित होगा। जहां पं. विजयशंकर मेहता उपस्थित रहेंगे। आस्था, संस्कार, बीटीवी तथा जी 36 घंटे पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण सांय 7 से 8 बजे होगा। साथ ही स्थानीय चैनलों पर समयानुसार प्रसारण होगा। यह आयोजन लोगों के जीवन में नई दृष्टि देगा। सफलता अर्जित करने वाले युग में सुख के साथ शांति कहां से मिले इसका समाधान हनुमानजी के चरित्र में और हनुमानचालीसा की पंक्तियों में है। देश-विदेश के कई स्थानों पर यह कार्यक्रम सीडी के माध्यम से भी संपन्न होगा। एक घंटे की सीडी के प्रदर्शन में आरंभ में साढ़े सात मिनट की विशेष धुन पर पाठ किया जाएगा। आरंभ में पाठ के पश्चात कार्यक्रम के प्रेरणा स्त्रोत पं. विजयशंकर मेहता का 40 मिनट की अवधि का व्याख्यान होगा। जिसमें हनुमानचालीसा और ध्यान (मेडिटेशन) पर प्रकाश डाला जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी महापाठ के इस आयोजन को दुनियाभर में सफलता मिली थी तथा 5 करोड़ से अधिक लोगों ने इसमें शामिल होकर आहूति दी थी।

Tuesday, March 9, 2010

महिला सरपंच ने बनाया-नशा मुक्त ग्राम

सिरसा(प्रैसवार्ता) महिलाएं भी पुरूषों से कम नहीं है और महिलाएं भी वह करके दिखा सकती हैं, जिसे शायद पुरूष न कर सके। ऐसी एक मिसाल पेश की है, कि जिला सिरसा के ग्राम छतरियां की सरपंच सुलोचना देवी वर्ष 2005-06 में सरपंच बनने के समय ग्राम में शराब बिना किसी रोक-टोक के बिकती थी और एक दिन महिला सरपंच ने बस अड्डे पर शराब की दुकान पर छोटे-छोटे बच्चों को शराब सेवन करते देखा, तो उसी क्षण उसने ठान लिया कि नशों से युवा वर्ग का भविष्य खतरे में पड़ सकता है, इसलिए ग्राम को नशा मुक्त बनाना है। इसी के साथ नशा मुक्त् िके खिलाफ सुलोचना देवी ने एक अभियान छेड़ दिया, जिसमें वह पूर्णतया कामयाब हुई है। पिछले दो वर्ष से शराब की बिक्री ग्राम छतरियां में बंद है और पंचायत तथा ग्रामीणों के सहयोग से पूरे ग्राम में शराब बेचने तथा सेवन करता पकड़े जाने पर ग्यारह हजार रुपये का दंड निर्धारित किया है-जिसका पालन करते हुए ग्राम वासियों ने एक भी व्यक्ति को दंडित की नौबत न आने का अवसर देकर नशा मुक्त ग्राम की स्वीकृति देकर एक अनूठी मिसाल कायम की है।

शादी के 14 वर्ष उपरांत भी नहीं देख पाई ग्राम

भोपाल(प्रैसवार्ता) विश्व में महिलाएं भले ही विभिन्न-विभिन्न क्षेत्रों में ऊंची उड़ान भर कर अपनी विशेष पहचान बना चुकी हैं, परन्तु ऐसी महिलाओं की भी भारत में कमी नहीं है-जो सिर्फ घर के चुल्हे-चौके तक सिमट कर रह गई हैं। मध्यप्रदेश के भोपाल जिले के गैरत गंज तहसील के राम खेड़ी की सरजू, एक ऐसी महिला है, जिसकी शादी 14 वर्ष पूर्व हुई थी और वह तीन बच्चों की मां है, ने अपनी यह आयु चुल्हे-चौके और मकान की चार दीवारी के अन्दर ही बिता दी है। पुरूषों से तो दूर स्त्रियों से भी खुलकर बात न करने वाली सरजू सदैव घूंघट मेें रहती है-भले ही घर में कोई पुरूष न हो। शिक्षा क्षेत्र में अनपढ़ रही सरजू की तरह इस ग्राम ऐसी कई ओर भी महिलाएं हैं। देश-दुनिया से बेखबर सरजू जैसी महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकार के लिए महिला आरक्षण बिल क्या सहयोग देगा, यह तो महिला आरक्षण बिल पास और लागू होने उपरांत ही पता चल पायेगा।

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