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Tuesday, June 15, 2010

आचार संहिता उपरांत फिर आचार संहिता

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का दूसरा कार्यकाल आचार संहिता के बीच है। राज्य चुनाव आयोग ने आठ जिलों के पंचायती चुनाव करवाने की घोषणा करके 15 जुलाई तक मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को एक राहत दी है, जिसके चलते उन्हें राजनीतिक कठिनाईयों को उत्पन्न करने वाले निर्णयों को टालने का अवसर मिल गया है, जिसमें मंत्रिमंडल का विस्तार तक शामिल है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी अनुसार तबादलों के इन महीनों में, जहां सरकारी कार्यालयों में सूनापन है, वहीं राजनेता भी आचार संहिता कह कर अपना पीछा छुड़वा रहे हैं। राज्य का सचिवालय तो मंत्री, मुख्य संसदीय सचिवों के दर्शनों को तरस गया है, क्योंकि मंत्री और संसदीय सचिव अपने-अपने क्षेत्र के चुनावों में व्यस्त है। सरकारी तंत्र भी किसी भी सरकारी फाईल को हाथ लगाने या आगे बढ़ाने में आचार संहिता की दुहाई देकर चुप्पी साध लेता है। आचार संहिता के चलते राजनीतिक प्रभाव डालने वाले निर्णय ही नहीं, बल्कि जनहित में लिए जाने वाले निर्णय भी आगे सरक जाते हैं।

'उमरां'च की राखिया है

हिसार(प्रैसवार्ता) विज्ञान ने एक बार फिर उम्र पर विजय हासिल करते हुए आई.वी.एफ तकनीक से सातरोड़ की भतेरी देवी ने 66 वर्ष की आयु में तीन बच्चों को जन्म देकर नया कीर्तिमान बनाया है। इस तकनीक से 29 मई को जन्म लेने वाले तीनों बच्चे सकुशल हैं। नैशनल फर्टीलिटी सैंटर के संचालक डा. अनुराग बिश्रोई ने ''प्रैसवार्ता" को बताया कि भतेरी देवी ने तीसरी बार गर्भधारण किया है। इससे पहले सिर्फ दो-दो भू्रण प्रत्यारोपित किये गये थे, लेकिन तीसरी बार उनकी बच्चेदानी में तीन भ्रूण प्रत्यारोपित किये गए, जिस पर भतेदी देवी ने दो लड़कों तथा एक लड़की को जन्म दिया। 21 मई 1944 को रोहतक जिला के ग्राम मदीना के लहरी सिंह दांगी के घर जन्म लेने वाली भतेरी देवी का विवाह देवा सिंह से हुआ था। देवा सिंह ने ''प्रैसवार्ता" को बताया कि भतेरी देवी से शादी उपरांत उसने दो और विवाह किये, लेकिन कोई सन्तान नहीं हुई थी, मगर अब तीनों बच्चों के जन्म से वह खुश है। डा. बिश्रोई के अनुसार आई.वी.एफ (इन विट फर्टीलाईजेशन) तकनीक से अच्छे परिणाम सामने आये हैं। वर्ष 2008 में जीन्द की राजो देवी ने 70 वर्ष की आयु में एक लड़की को जन्म दिया था। इससे पूर्व 2005 में रोमानिया की एक 66 वर्षीय महिला ने दो बच्चों को जन्म दिया था। उन्होंने बताया कि आई. वी.एफ को परखनली शिशु तकनीक कहा जाता है। इसमें पुरूष के शुक्राणु व महिला के अंडाणु प्राप्त कर उससे भू्रण तैयार करके 48 से 72 घंटे तक इंक्यूवेटर में रखने उपरांत महिला की बच्चेदानी से प्रत्यारोपित किया जाता है।

सरकार को सहयोग दे रहे-तीन निर्दलीय विधायकों को जोर का झटका धीरे से

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) निर्दलीय विधायकों के सहारे बनी हरियाणा की हुड्डा सरकार ने अपने एक मंत्री और दो मुख्य संसदीय सचिवों के परिवारजनों के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज करके इन्हें जोर का झटका धीसे से दिया है-जबकि इससे पूर्व भी हुड्डा की इस झटका तकनीक से पूर्व वित्त मंत्री वीरेन्द्र सिंह, पूर्व मंत्री किरण चौधरी, प्रदेश कांग्रेस प्रधान फूल चंद मुलाना समेत कई कांग्रेसी दिग्गज अभी तक उभर नहीं पाये हैं। विधानसभा चुनाव में अपने विरोधी कांग्रेसी दिग्गजों का सफल आप्रेशन करने वाले भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने सात निर्दलीय विधायकों की मदद से सरकार बनाई थी, जिनमें से चार को मंत्री पद तथा तीन को मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया था। हाल ही में हुए नगर निगम फरीदाबाद के चुनाव में राजस्व राज्य मंत्री शिवचरण शर्मा की पत्नी और बेटे के खिलाफ पुलिस द्वारा विभिन्न-विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करना, मेवात जिले के ग्राम जमालगढ़ में मुख्य संसदीय सचिव जलेब खान के दामाद के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार करना तथा गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा के खिलाफ मुख्य सचिव को मामले पर कार्यवाही का निर्देश संकेत देता है, कि निर्दलीय विधायकों से जरूरत पर समर्थन लिया गया था, मगर अब स्थिति में बदलाव आ चुका है। जिक्र योग है कि 1999 में राज्य के 22 विधायकों ने बंसी लाल का साथ छोड़कर इनैलो की सरकार बनाई थी और वर्ष 2000 में हुए विधानसभा चुनावों में इन्हें अपना प्रत्याशी न बनाते हुए इनैलो सुप्रीमों ओम प्रकाश चौटाला ने यह कहकर इंकार कर दिया था, कि तुम बंसी लाल के होकर भी नहीं हो सके, मैं तुम पर कैसे विश्वास कर लूं। शायद इसी तर्ज पर हुड्डा चल रहे हैं।

Saturday, June 12, 2010

रंजीव दलाल नहीं एमएस मलिक है हरियाणा के डीजीपी

सिरसा(प्रैसवार्ता) केंद्र व राज्य सरकार बेशक पुलिस के आधुनिकीकरण की बात करती हो, स्वयं पुलिस महानिदेशक पुलिस को अपडेट करने के बयान देते हों, मगर जमीनी हकीकत इससे इत्तफाक नहीं रखती। कागजों में कभी मार न खाने वाली पुलिस कंप्यूटर पर तो इस मामले में निरक्षर ही साबित हो रही है। यही वजह है, कि राज्य पुलिस की वेबसाइट पर आज भी एमएस मलिक को ही पुलिस महानिदेशक दर्शाया हुआ है। इतना ही नहीं लगभग सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के नाम भी वे शो किए हुए हैं, जो पदोन्नति पाकर अतिक्ति पुलिस महानिरीक्षक या पुलिस महानिरीक्षक बन चुके हैं। पुलिस की वेबसाइट पर जॉन वी जॉर्ज को आईजी कानून व्यवस्था दिखाया हुआ है, जबकि वे कभी के इस पद से पदोन्नति पाकर एडीजीपी बन चुके हैं। इसी प्रकार राकेश मलिक को आईजी प्रशासन, रविकांत शर्मा को आईजी आधुनिकीकरण एवं वैल्फेयर दिखाया हुआ है। इनकी सहायता के लिए जिन अधिकारियों के नाम पुलिस की वेबसाइट पर मौजूद हैं, वे भी गुमराह करने वाले हैं। परमिंद्र राय को डीआईजी प्रशासन, यशपाल सिंघल को डीआईजी ट्रेनिंग, अनिल दावड़ा को डीआईजी आधुनिकीकरण एवं कल्याण प्रस्तुत किया गया है। इसी प्रकार चारों पुलिस रेंज में भी उन अधिकारियों के नाम आईजी के तौर पर दर्शाए गए हैं, जो या तो रिटायर हो चुके हैं या फिर किसी अन्य पद पर पहुंच गए हैं। अंबाला रेंज में एचएस अहलावत को आईजी दिखाया गया है। हिसार के आईजी के तौर पर आरएन चालिया को दर्शागया गया है, जबकि चालिया अपने पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। गुडग़ांव रेंज में आरएस दलाल को आईजी दिखाया गया है, जबकि रोहतक रेंज में रेशम सिंह को आईजी दिखाया गया है। रेशम सिंह भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जिलों में मामले में भी पुलिस अभी बरसों पीछे है। पुलिस के वेबसाइट आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 19 जिले ही हैं। सभी जिलों में कई बार एसपी बदले जा चुके हैं, परन्तु पुलिस की वेबसाइट इससे तवज्जो नहीं रखती। पुलिस की वेबसाइट की मानें तो पंचकुला में सीएस राव, अंबाला में केके मिश्रा, यमुनानगर में केके सिंधु, कुरूक्षेत्र में देसराज सिंह, कैथल में पीआर देव, करनाल में एएस अहलावत, पानीपत में कुलदीप सिंह, सोनीपत में एएस चावला, रोहतक में पीके अग्रवाल, झज्जर मोहम्मद शकील, गुडग़ांव में एसएस कपूर, फरीदाबाद में आरएस शर्मा, नारनौल में एमएस कपूर, फरीदाबाद में आरएस शर्मा, नारनौल में एमएस अहलावत, रेवाड़ी में एसपी रंगा, हिसार में संदीप खिरवार, सिरसा में एकेराव, भिवानी में सुमन मंजरी, जींद में राजपाल सिंह व फतेहाबाद में हनीफ कुरैशी पुलिस की कमान संभाल रहे हैं। मजे की बात यह है कि उक्त सभी आईपीएस अधिकारी पुलिस की विभिन्न शाखाओं में आईजी या उससे भी ऊंचे पद पर पदोन्नति पा चुके हैं। पुलिस की वेबसाइट अपडेट करने वालों ने तो पुलिस का मानचित्र ही बदलकर रख दिया और प्रदेश में 19 जिले ही प्रस्तुत किए हैं, जबकि प्रदेश में 22 जिले अस्तित्व में आ चुके हैं।

26 अगस्त तक हो जायेगा-किराया एक्ट लागू

बठिण्डा(प्रैसवार्ता) पंजाब सरकार 26 अगस्त से पहले किराया एक्ट लागू कर देगी, अदालत ने इस प्रकरण में सरकार को निर्देश जारी किया है। अदालती निर्देश उपरांत सरकार गंभीर हो गई है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी अनुसार अदालत ने याचिकाओं उपरांत इस मामले में बनी कमेटी की रिपोर्ट उपरांत 26 अगस्त तक इस एक्ट को लागू करने को कहा था। उक्त एक्ट लागू होने का मामला काफी समय से लटक रहा था। बेअन्त सिंह सरकार (1995) के समय तैयार किये गये इस एक्ट को राष्ट्रपति ने भी 1998 को स्वीकृति प्रदान कर दी थी। कैप्टन सरकार सरकार के कार्यकाल में भी यह मामला अटका रहा था, क्योंकि इस मामले में में दो याचिकाएं अदालत में दायर की गई थी, जिनमें से लुधियाना के वकील इंद्रजीत सिंह की ओर से 1878/2000 तथा मनजीत कौर द्वारा 2004/14281 की याचिका शामिल थी। इस प्रकरण में अदालती निर्देश न मानने पर एक अधिकारी की खिंचाई भी की गई थी। अगस्त 2009 में इस प्रकरण से संबंधित एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसने पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक, राजस्थान में जाकर पाया था, कि किराया एक्ट के अच्छे परिणाम हैं-जिनसे पालिका/निगमों को ज्यादा आय होगी। प्रदेश में अभी तक 1949 उपरांत उक्त कानून को पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया, क्योंकि भारत-पाक विभाजन होने उपरांत पाकिस्तान से काफी संख्या में लोग भारत आये थे, जहां उनके रहने के लिए मकानों की कमी थी। इस पांच साल के लिए बढ़े कानून मुताबिक न तो किराया बढ़ाया जा सकेगा और न ही किरायेदार को निकाला जायेगा। ''प्रैसवार्ताÓÓ के अनुसार किराया एक्ट लागू होने से दुकानों के किराये में भी बढ़ौत्तरी होगी और शहरों में विकास गति तीव्रता लेगी। इस प्रकरण में गठित सुखबीर-कालिया कमेटी द्वारा एक हजार करोड़ से ज्यादा राजस्व आने की संभावना व्यक्त की है। इस संबंध में स्थानीय शासन और निकाय विभाग द्वारा भी सर्वेक्षण करवाया गया था, जिससे पता चला था कि राज्य में किरायेदारों की संख्या ज्यादा है। इस एक्ट को लागू करने के मामले में केन्द्र सरकार ने पंजाब सरकार को पुन:''यूजर चार्ज" लगाने को कहा था। इसमें किराया एक्ट लागू किये जाने की भी चर्चा है।

Friday, June 11, 2010

नकली घी के बाद अब नकली सरसों तेल की बिक्री

सिरसा(प्रैसवार्ता) जिला सिरसा के कालांवाली क्षेत्र में देसी घी व नकली दूध की बिक्री के बाद इन दिनों सरसों का नकली तेल भी जोर-शोर से बिक रहा है। नकली सरसों के तेल की बिक्री से लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है वहीं कम कीमत वाले इस नकली तेल को महंगे रेट पर बेचा जा रहा है। इसके साथ इस तेज का वजन भी कम होता है। इस नकली तेल की बिक्री को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के कारण यह धंधा पूरे जोर शोर से जारी है। ''प्रैसवार्ता" को मिली जानकारी अनुसार मंडी कालांवाली व अन्य कस्बों में विभिन्न ब्रांडों के नकली तेल की बिक्री जोरों पर हो रही है। यह तेल बोतलों की पैकिंग में उपलब्ध है। पता नहीं यह तेल कहां से आता है। बोतलों के रेपरों पर सिरसा व पंजाब की मंडी किलियांवाली के नाम का पता दिया जाता है। यह तेल इतनी सुंदर पैकिंग में उपलब्ध करवाया गया है ताकि ग्राहकों को इसके नकली होने का पता न चल सके। जब इस संबंध में क्षेत्र के एक निजी चिकित्सक से बात की तो उसने बताया कि जिस प्रकार केमिकल इस तेल में प्रयोग किए जा रहे है वे मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। पता चला है कि इस तेल में सस्ते तेलों के अलावा कई केमिकल भी मिलाए जाते है ताकि यह तेल असली की तरह नजर आए। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि जब यह तेल फ्रिज में रखा गया तो घी की तरह जम गया जबकि असली सरसों का तेल कभी नहीं जमता। कई उपभोक्ताओं ने प्रैसवार्ता को बताया कि इस तेल का स्वाद असली तेल जैसा नहीं है।

Tuesday, June 8, 2010

हरियाणा: जहां प्रसूति वार्ड में पुरूष करते हैं-डयूटी

नारनौल(प्रैसवार्ता) स्थानीय सिविल अस्पताल के प्रसूति गृह में महिला स्टाफ नर्स की जगह पुरूष डयूटी कर रहे हैं, जिसके चलते प्रसूति करवाने वाली महिलाएं सहमी-सहमी रहती हैं। वहीं मरीज के साथ आये तीमारदार भी परेशान होते हैं। प्रसूति गृह में पुरूषों की डयूटी और वह भी एक राज्य में, जहां महिलाएं घूंघट में रहती हैं, चिंतनीय है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार प्रसूति गृह में डिलीवरी भी महिला नर्सों द्वारा की जानी अनिवार्य है तथा पुरूषों का इस वार्ड में प्रवेश वर्जित है, परन्तु नारनौल के सिविल अस्पताल में सब कुछ सरकारी आदेशों के विपरीत हो रहा है। पुरूषों की उपस्थिति में, जहां प्रसूति करवाने वाली महिला सहमी-सहमी रहती है, वहीं उसकी गोपनीयता भी भंग होती है। देश, जहां महिला सशक्तीकरण की ओर बढ़ रहा है, ऊंचे-ऊंचे पदों पर महिलाएं आसीन हो रही हैं, वहीं नारनौल में प्रसूति के लिए महिलाओं को पुरूषों के सामने अपनी डिलीवरी करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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