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Tuesday, December 15, 2009

अभिव्यक्ति और प्रस्तुति का अनूठा हस्ताक्षर डा.विष्णु सक्सैना

पवन पंडि़त पत्रकार की खास रिपोर्ट
गीत साहित्य की बहुत कोमल विधा है। इसलिये समय-समय पर इसकी कोमलता के साथ छेडछाड होती रही है। एक वह समय था कि कवि सम्मेलन के मंच पर गीत हस्ताक्षरों का प्रादुर्भाव हुआ करता था और एक दो हास्य कवियों को चटनी के बतौर आमंत्रित कर लिया जाता था। धीरे-धीरे ये चटनी गीत जैसे ज़ायकेदार सुपाच्य भोजन को ही चट करने लगी और गीत की स्थिति बडी दयनीय होती चली गयी। उस काल के गीत विधा के शीर्षस्थ रचनाकारों में कुछ तो इस लडाई को लड ही न सके, कुछ ने कमज़ोरी छुपाते हुये अपने को गज़ल की ओर मोड लिया, कुछ ने लडाई लडी भी तो अकेले पड जाने के कारण समाप्त हो गये। परिणामत: हास्य का झंडा बुलंद होता चला गया। बलबीर सिंह रंग, रमानाथ अवस्थी, वीरेन्द्र मिश्र, नीरज, भारत भूषण और डा. कुँवर बेचेन के बाद एक बहुत बडा अंतराल आया... एक बार को तो एसा लगने लगा कि गीत कहीं मंच से समाप्त न हो जाये। तब 80 और 90 के दशक में गीत की चिंगारी लेकर एक ऐसा युवा गीतकार मंच पर आया जिसे सुन कर सभी हतप्रभ रह गये, धीरे-धीरे इस चिंगारी ने मशाल का रूप ले लिया। प्रकृति परिवर्तन माँगती है और यह परिवर्तन ही आज हिन्दी कवि सम्मेलनों की आवश्यकता बन गया है। इस कवि के स्वर में जितनी कशिश है उतने ही अंतस तक स्पर्श करने वाले शब्द----
हमने देखें हैं पत्थर पिघलते हुये,
शीत जल में से शोले निकलते हुये,
तुम न बदलोगी ये कैसे विश्वास हो
हमने देखे हैं मौसम बदलते हुये,
इस बदले हुये मौसम में अपने इंद्रधनुषी गीतों की छटा बिखेरने वाले इस गीतकार का नाम है डा. विष्णु सक्सैना । जो हाथरस जिले की सिकन्दराराऊ तहसील के निवासी हैं। प्रायमरी से लेकर इंटर तक की शिक्षा यहीं से लेने के बाद स्नातकीय शिक्षा के लिये राजस्थान जाना पडा। उदयपुर से चिकित्सा शास्त्र में प्रथम श्रेणी की डिग्री ले यह अपने ही नगर में आकर निजी क्लीनिक में रोगियों का उपचार कर रहे हैं। इतनी व्यस्तताओं में से जो भी खाली समय बचता है उसे कविता के रस से भर लेते हैं।
पेशे से चिकित्सक डा. विष्णु सक्सैना अपने अन्दर एक नाज़ुक सा, कोमल सा दिल भी रखते हैं इसलिये इनकी कविता में दर्द भी है और उसका इलाज भी। डा. सक्सैना को कविता विरासत में मिली है। इनके दादा श्री चन्द्रभान शशिरवि तो जिकडी भजनों के सिद्ध कवि थे, उन्होंने न जाने कितनी गज़लें और लोकगीत लिखे। ग्रामीण परिवेश में जीवन यापन होने के कारण उनकी समस्त रचनाओं में गाँव की मिट्टी की सोंधी-सोंधी गंध भी समाहित थी। पिता श्री नारायण प्रकाश और माँ श्रीमती सरला सक्सैना के सुसंस्कारित प्रयासों के प्रतीक डा. विष्णु के कविता के मंच पर आने से गीत को पुनर्जीवन तो मिला ही है साथ ही श्रोता जिस मानसिकता से हास्य व ओज की कविताओं को सुनता था, आज उतने ही मनोयोग से उनके गीतों को सुनने के लिये लालायित होता है। दिनों दिन बढती लोकप्रियता का ही परिणाम है कि अपनी छोटी सी उम्र में लगातार ऊँचाइयाँ छू रहे हैं। इसलिये आज उन्हें आकाशवाणी, टीवी, तथा स्तरीय पत्र पत्रिकाओं में यथोचित सम्मान मिल रहा है।
मुस्कुराहट के पन्ने पलट दो ज़रा
बाँच लूँगा सभी प्यार की पोथियाँ,
नेह की बात होगी निबन्धों में जब
कसमसायेंगीं आपस की अनुभूतियाँ,
कविता तो एक तपस्या की तरह है, जिसमें सब कुछ भूल कर ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। खुद को डुबोना पडता है तभी जीवन का वास्तविक आनन्द आता है। विष्णु जी की रचनाओं में भी कुछ ऐसी ही अनुभूतियाँ हैं, प्रेम की सूक्ष्म संवेदनाओं की विवेचना है---
क्यूँ बिछाकर दुपट्टा हरी घास पर
मेरे सपनों को उसमें समेटा बता?
एक चटका हुआ आँसुओं का कलश
काँपते हाथ से क्यूँ समेटा बता?
मन करता है कि बस विष्णु सक्सैना पढते रहें और हम सुनते रहें। इनके प्रेम गीतों में विशेष बात ये है कि चाहे वह संयोग पक्ष हो या वियोग पक्ष, कहीं भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं होता।
थाल पूजा का लेकर चले आइये
मंदिरों की बनावट सा घर है मेरा।
* * * *
लाँघना ना कभी देहरी प्यार में
चाहे मीरा को मोहन मिले न मिले।
साहित्य साधना के लिये दृढता, धेर्य और त्याग की भी ज़रूरत होती है। ये सब इनकी कविताओं में पढने और सुनने से दिखाई देता है। यही कारण है कि इनके शब्द आत्मा की गहराई से निकल कर सशक्त प्रस्तुति के माध्यम से जब श्रोताओं के सामने आते हैं तो बरबस ही मुँह से आह और अन्दर से वाह निकलने लगते है---
वंदनवारें तो बांध नहीं पाया पर
चौखट पर दोनों आँखें बंधी हुयी हैं,
तुम आओगे तो एक फूल तोडोगे
सारी कलियाँ खिलने से रुकी हुयी हैं,
इनकी कविताओं में मात्र नायक नायिकाओं के प्रेम प्रसंग ही नहीं अपितु उनके माध्यम से देश की समस्याओं को भी हल करने की कोशिश की गयी है।
मस्ज़िद हैं आप तो मुझे मन्दिर ही मान लो,
हो आयतों में तुम मुझे श्लोक जान लो,
कब तक सहेंगे और रहेंगे अलग-अलग
मैं पूजूँ तुम्हें तुम मेरे दिल में अज़ान दो,
ये कहते हैं कि कवि और श्रोताओं के बीच की दूरी को कम करने के लिये हमें अपने तमाम पूर्वाग्रहों को छोड कर आम बोल चाल की भाषा का ही प्रयोग करना चाहिये जिससे श्रोता आसानी से आपकी बात आत्मसात कर लेगा, तभी कला को पूर्ण सम्मान मिलेगा।
इस व्यावासायिकता के युग में सभी गुटबन्दियों से अलग डा. सक्सैना ने हमें बताया कि उनके 'मधुवन मिले न मिले' 'स्वर अहसासों के 'खुश्बू लुटाता हूं' नामक गीत संग्रह तथा 'प्रेम कविता' 'तुम्हारे लिये' नामक सीडी बाज़ार में उपलब्ध हैं। कवि सम्मेलनों की घटती लोकप्रियता के बारे में वे कहते हैं कि इलेक्ट्रानिक मीडिया तथा अश्लील फूहड हास्य ने अच्छे श्रोता कवि सम्मेलनो से दूर कर दिये हैं।
गत दिनों अनेक सम्मानों से सम्मानित विष्णु जी ओमान, अमेरिका, इसराइल, थायलेंड, दुबई, हांगकांग, नेपाल में भी अपने रसीले गीतों की फुहार छोड कर आये हैं। साँवला सलोना, हरदम मुस्कराता, सुदर्शन तथा विलक्षण प्रतिभा का ये युवा कवि डा. विष्णु सक्सैना आज हिन्दी कविता की धडकन बन गया है। उसके प्रशंसकों की असीम शुभ कामनायें यदि फलीभूत हो गयीं तो भविष्य का ये इकलोता गीतकार होगा जिसे देख कर आंखें तृप्ति का और मन अतृप्ति का आभास करेगा--
आओ मेंहन्दी महावर की शादी करें,
उम्रभर साथ रहने का आदी करें,
फूल से पंखुरी अब न होगी अलग,
सारे उद्यान में ये मुनादी करें,
हमको जितना दिखा- सिर्फ तुमको लिखा
अब ये पन्ना यहीं मोड दें---------------

Friday, December 11, 2009

ब्राह्मीपान से हजारों छात्र/छात्राएं ले रहे है बौद्धिक लाभ

(ग्राम खमरा में प्रतिवर्ष हो रहा है, देश का एकमात्र अभिनव आयोजन)
छिन्दवाड़ा(प्रैसवार्ता) सरस्वती जयंती बसंत पंचमी के उपलक्ष्य पर भागवत भूषण पं. रामविशाल शुक्ल के मार्गदर्शन पर सरस्वती महोत्सव एवं ब्राह्मीपान समिति खमरा वि. ख. बिछुआ द्वारा आयोजित देश के एक मात्र अनुठे ब्राह्मीपान कार्यक्रम के जरिये इस वर्ष भी पॉंच हजार से अधिक छात्र/छात्रायें अपनी बौद्धिक क्षमता की वृद्धि का लाभ लेने खमरा में जुटेंगे । जिले के विकासखण्ड बिछुआ के ग्राम खमरा में प्रतिवर्षानुसार आयोजित इस कार्यक्रम के संस्थापक पं. रामविशाल शुक्ल ने बताया कि विगत दस वर्षो से चला आ रहा यह कार्यक्रम अपने आप प्रदेश ही नही अपितु देशभर का इकलौता अनुठा अभिनव कार्यक्रम है जिसकी ख्याति के चलते हर वर्ष इस पुनीत पर्व बसंत पंचमी सरस्वती जयंती में इसका लाभ लेने वालों की संख्या हजारों में बढ़ती जा रही है । कार्यक्रम के प्रारंभ में जहॉं इस कार्यक्रम में सम्मिलित लोगों की संख्या 250 थी । वही अब लगभग 4 से 5 हजार के करीब हो चुकी है । वेदों में उल्लेख है: पं. श्री शुक्ल ने बताया है कि शास्त्रों एवं वेदों में सरस्वती का श्री विग्रह शुक्ल वर्ण है यह परम सुन्दरी देवी सदा हॅंसती रहती है इसके परिपुष्ठ विग्रह के सामने करोड़ो चन्द्रमा की प्रभा भी तुच्छ है ये विशुद्ध चिन्हमय वस्त्र पहने है इनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक । सर्वोत्तम रत्नों से वने हुए आभूषण इन्हें सुशोभित कर रहे है । ब्रम्हा, विष्णु, शिव प्रभृति प्रधान देवताओं तथा सुरगणों से सुपूजित है । इन्हें सुगंधित सफेद पुष्प और सफेद चंदन अर्पण करना चाहिए । श्वेत पुष्पों की माला और भूषण भगवती को चढ़ावे और भगवती सरस्वती का ध्यान परम सुखदायी है तथा धर्म का उच्छेद करने वाला है माघ शुक्ल पंचमी अर्थात वंसत पंचमी सरस्वती जयंती विद्यांरभ की मुख्य तिथि है उसदिन पूर्व अपरान्ह काल में पूर्वाहन पवित्र रहे स्नान और नित्य क्रिया पश्चात शोडशेपचार से मॉं भगवती की पूजा करे । नैवेद्य में तिल के लड्डु, मिश्री,, सफेद रंग की मिठाई, गेहॅं के आटे में तले पदार्थ, नारियल, पका हुआ केला, धान का लावा आदि विशेष रूप से चढ़ावे । सरस्वती को मिला शाप बना वरदान: लक्ष्मी सरस्वती गंगा तीनों ही भगवान श्री हरि की भार्या है । एक बार सरस्वती को यह संदेह हो गया कि श्री हरि मेरी अपेक्षा गंगा से अधिक प्रेम करते है । तब उन्होंने श्री हरि को कड़े शब्द कहे फिर वे गंगा को क्रोध करके कठोर बरताव करने लगी तब लक्ष्मी ने उन्हें रोक दिया । इस पर सरस्वती ने लक्ष्मी को गंगा का पक्ष करने वाली मानकर श्राप दे दिया तुम निश्चय ही वृक्षरूपा और नदी रूपा हो जाओंगी । तब गंगा ने सरस्वती को श्राप दे दिया की वह भी नदी रूपा और वृक्षरूपा हो जाये । गंगा की बात सुनकर सरस्वती ने भी उन्हें वही श्राप दे दिया श्राप से लक्ष्मी पदमावती नदी और तुलसी वृक्ष के रूप में धरती के रूप में अवतरित हुई । इसी प्रकार गंगा भी भागीरथी और धात्री वृक्ष के रूप में अवतरित हुई। सरस्वती कला के अंश से नदी के रूप में भारत वर्ष में पधारी आधे अंश से ब्रम्हा के अंश में पधारी तथा ब्राह्मी वृक्ष रूपणी और पूर्ण अंश से स्वयं भगवान के पास रही । ब्राह्मी सेवन प्रयोग: कण्व शाखा के अनुसार जो व्यक्ति माद्य शुक्ल पंचमी सरस्वती जयंती के दिन सरस्वती का शोडशोपचार से पूजन कर सरस्वती कवच धारण करने पश्चात ब्राह्मीपान धारण करता है उसकी मेधा बौद्धिक क्षमता में चमत्कारित ढ़ंग से वृद्धि होती है । माद्य कृष्ण चतुर्दशी से माद्य शुक्ल पंचमी तक ब्राह्मी पान शुभ फलदायी होता है ।
अद्रक - भद्रक, पीतरसं, वच बाकुचि, ब्राह्मी, सहाघृतम
माद्य चतुर्दश कृष्ण दिनम् अस् बोलत कोकिल नाद रतम
कणाद, गौतम, कण्व पाणिनी शाकटायन, दक्ष और कात्यायन आदि ऋषियों ने सरस्वती कवच धारण पश्चात ब्राह्मीपान करके ही गं्रथों की रचना में सफल हुये । सरस्वती कवच के ऋषि प्रजापति है स्वयं वृहति छंद है माता शारदा अधिष्ठात्री देवी है इस प्रयोग से स्मृति शक्ति, ज्ञान शक्ति और बुद्धि का वर्धन होता है। भ्रमरूपी अंधकार को मिटाने वाला प्रकाशमान ज्योति के सदृष निर्मल ज्ञान प्राप्त होता है । देश का अद्वितीय अभिनव आयोजन: प्रदेश का ही नही बल्कि देशभर का यह अद्वितीय अनुठा अनुपम प्रयोग पूर्व ऋषियों की परम्परानुसार मस्तिष्क कोषिकाओं का पोषक एवं स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक स्नायुतंत्र को मजबूत करने वाला कुषाग्र बुद्धि मानसिक एवं बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने वाला है । क्यों आवश्यक है ब्राह्मीपान? वर्तमान समय में सम्पूर्ण पोषक तत्वों एवं आहार का अभाव तथा टी। वी., कम्प्यूटर, फिल्म, मोबाईल के निरंतर प्रयोग से बच्चों में लगातार बौद्धिक क्षमता की गिरावट हो रही है । ऐसी स्थिति में ब्राह्मी पान ही एकमात्र विकल्प है । जो बिना किसी दुष्परिणाम के बौद्धिक क्षमता में वृद्धि के रूप में चमत्कारिक लाभ देती है । पात्रता: सामान्य तौर पर हर व्यक्ति को ब्राह्मीपान की आवश्यकता है किन्तु ब्राह्मीपान के नियमानुसार 5 वषों से अधिक उम्र के वे बालक/बालिका जो विद्या अध्ययनरत् हो उनकी एकाग्रता स्मरण शक्ति, बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने हेतु इसका सेवन अवश्य करें । आयोजन: मुख्यालय से लगभग 40 कि.मी. दूर ग्राम खमरा वि.ख. बिछुआ में बसंत पंचमी सरस्वती जयंती के उपलक्ष्य पर भव्य सरस्वती महोत्सव एवं ब्राह्मीपान का अद्वितीय कार्यक्रम दिनांक 20 जनवरी 2010, दिन बुधवार को प्रात: 8 बजे से पं. रामविशाल शुक्ल के मार्गदर्शन में सम्पन्न होगा । पॉंच चरणों में आयोजित कार्यक्रम में प्रथम चरण - प्रात: 8 बजे से 10 बजे तक । द्वितीय चरण - प्रात: 10 बजे से 12 बजे तक । तृतीय चरण - दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक । चतुर्थ चरण - दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक तथा पंचम चरण - शाम 4 बजे से 6 बजे तक पूर्ण होगा । इस कार्यक्रम में सरस्वती पूजन एवं कवच धारण के उपरांत ब्राह्मीपान कराया जायेगा । जिसमें उपस्थित होने हेतु इच्छुक केवल मीठा भोजन ग्रहण कर ही निर्धारित सहयोग राशि देकर श्वेत वस्त्र धारण कर कार्यक्रम में उपस्थित होकर लाभ ले सकते है । इसी दौरान दिनांक 16 जनवरी 2010 से 24 जनवरी 2010 तक श्रीमद् भागवत कथा का वाचन पं. रामविशाल शुक्ल के मुखारबिन्द से होगा । इस विशाल भव्य कार्यक्रम में आयोजक समिति द्वारा समस्त इच्छुक धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में उपस्थित होकर पुण्य लाभ लेने की अपील की है।

Wednesday, December 9, 2009

अध्यक्ष का चुनाव सीधा करवाने की योजना

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) हरियाणा सरकार देश के कई राज्यों में महापौर, सभापति और अध्यक्ष के सीधे शहरी निकाय चुनावों में निर्वाचन की व्यवस्था की तर्ज पर हरियाणा में भी लागू करने पर विचार कर रही है, क्योंकि लोकतंत्र को मजबूत बनाने तथा शहरी निकायों को अधिक स्वतंत्र बनाने के उद्देश्य से निकाय प्रमुखों का सीधा चुनाव बेहतर निर्णय साबित हो सकता है। राज्य सरकार इसके लिए नगर पालिका ऐक्ट और नियमों में संशोधन करने जा रही है। सरकार की दलील है कि इस नये निर्णय से न सिर्फ निकायों के काम काज में तेजी आयेगी, बल्कि पार्षदों की खरीद-फरोक्त बंद होने के साथ-साथ गुटबंदी पर अंकुश लगेगा।

रिश्वतखोर पकडऩे को सी.बी.आई की हैल्प लाईन

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) रिश्वत खोरों पर शिकंजा कसने के लिए सी.बी.आई ने मुहिम छेड़ दी है-इसके लिए बकायदा फोन हैल्पलाईन शुरू की गई है और एस.एम.एस के जरिये आम लोगों तक इस नंबर को पहुंचाया जा रहा है। रिश्त मांगने वाले केन्द्र सरकार के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ 0172-2657135/2657469 पर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। शिकायत कर्ता का नाम व पता गुप्त रखा जाता है। सी.बी. आई चंडीगढ़ के डी.आई.जी महेश अग्रवाल के मुताबिक रिश्वत समाज और देश की जड़ें खोखली कर रहा है-इसलिए सी.बी.आई की इस मुहिम में बढ़ चढ़कर लोगों को भागीदारी बनानी चाहिए।

Saturday, December 5, 2009

एक और लव गुरु, शिष्या से की शादी

47 वर्षीय रामधन ने 19 वर्षीय प्रेमिका से शादी के बाद नौकरी छोड़ी
नई दिल्ली(प्रैसवार्ता) लव गुरु मटुकनाथ की राह पर चलते हुए एक शिक्षक ने अपनी छात्रा से न केवल प्रेम विवाह किया बल्कि उसके लिए नौकरी व घर-परिवार भी छोड़ दिया। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के 47 वर्षीय रामधन ने अपनी 19 साल की प्रेमिका से शादी करने के बाद नौकरी छोड़ कर राजधानी दिल्ली में अपना बसेरा बना लिया है। गुरु-शिष्या से पति-पत्नी बने इस जोड़े को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुरक्षा देने को कहा है। दरअसल रतलाम जिले के एक कॉलेज में शिक्षक के पद पर तैनात रामधन को अपनी ही छात्रा से प्रेम हो गया। दोनों ने कुछ दिन पहले शादी कर ली, लेकिन लड़की के घर वालों व समाज के भय से रामधन नौकरी से इस्तीफा देकर प्रेमिका से पत्नी बनी राधा (बदला हुआ नाम) को लेकर राजधानी आ गया। कुछ दिन बाद जब राधा को एहसास हुआ कि उसके परिजन उसे व उसके पति को नुकसान पहुंचा सकते हैं तो उसके दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सुरक्षा की गुहार लगाई। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने संबंधित थाना प्रभारी को इस प्रेमी युगल को सुरक्षा प्रदान करने को कहा है। साथ ही रामधन को हाईकोर्ट ने इस बात का हलफनामा देने को कहा है कि उसने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है और लड़की के पिता को भी रामधन पर लगाए गए तीन-तीन शादी करने के आरोप के बारे में हलफनामा देने को कहा है। हाईकोर्ट ने इसके अलावा रामधन व लड़की के पिता को अगली सुनवाई पर निजी रूप से पेश होने को कहा है। इससे पहले सुनवाई के दौरान रामधन व राधा ने कहा कि दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं। राधा ने कोर्ट को बताया कि वह 19 साल की है और उसने अपनी मर्जी से रामधन से विवाह किया है। वहीं राधा के पिता ने कहा कि रामधन पहले से तीन-तीन शादी कर चुका है और पहली पत्नी से उसे बच्चा भी है।

हरियाणा की राजनीति में परिवारवाद का बोलबाला

वैसे तो देश भर की राजनीति परिवारवाद अपनी जड़े जमा रहा है, परन्तु हरियाणा प्रदेश की राजनीति पर प्रख्यात पत्रकार चन्द्र मोहन ग्रोवर की एक दिलचस्प रिपोर्ट प्रस्तुत की जा रही है। हरियाणा की राजनीति में कुछ परिवारों का वर्चस्व चला रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी हरियाणा राज्य में कुछ ऐसे परिवार हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति पर हावी रहे हैं। भारत में चुनावों की शुरूआत के समय से ही लोग यहां राजनीति में आए और उसके उपरांत उसी परिवार के लोग भतीजा, भतीजी, बेटा बेटी, नाती, दोहते आदि काफी संख्या में राजनीति में सक्रिय हैं। यह अलग बात है, कि कुछ सफल हुए तथा कुछ असफल होकर राजनीति से दूर चले गए। इतना प्रगतिशील व प्रवर्तनवादी राज्य होने के बावजूद हरियाणा की राजनीति सामंतवादी परम्परा से अछूती नहीं रही है और स्पष्ट तौर पर यहां की राजनीति में कुछ गिने चुने परिवार ही सैदव हावी रहे, जो राज्य के सभी वर्गों व सम्प्रदायों से संबंध रखते हैं। पत्रकार चन्द्र मोहन ग्रोवर ने हरियाणा की राजनीति पर दिलचस्प आंकड़े एकत्रित किये हैं। जिनके मुताबिक हरियाणा के स्व. चौ. देवीलाल तथा उनके परिवार को देश में सर्वाधिक चुनाव लडऩे का गौरव प्राप्त है और वह भी विभिन्न क्षेत्रों से। भारत वर्ष में आज भी कोई ऐसा राजनीतिक परिवार नहीं है, जो चौ. देवीलाल के परिवार की बराबरी कर सकता है। विशेष बात यह है कि स्व. देवीलाल और उनके राजनीतिक वारिस बेटे चौ. ओमप्रकाश चौटाला कई बार हरियाणा के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। यदि विवेचनात्मक ढंग से हरियाणा की राजनीति पर दृष्टि दौड़ाई जाये, तो पता चलेगा कि हरियाणा में एक दर्जन परिवार ऐसे हैं, जिनके सदस्य तीन पीढिय़ों से सक्रिय राजनीति में हैं। इनमे सर्वप्रथम देशबंधु सर छोटूराम का परिवार है, जो 1920 से राजनीति में सक्रिय है। इतना ही पुराना चो. मातू राम सांधी वालों का परिवार है। यह सत्य है कि सर छोटूराम के दो परिवार लगातार राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण पहचान बनाये हुए हैं। दीनबंधु के भतीजे स्व. चौ. चन्द लम्बे समय तक संयुक्त पंजाब और फिर हरियाणा में विधायक रहे तथा हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष भी बने। चौधरी श्री चन्द की पुत्री बसंती देवी भी हरियाणा की विधायक रह चुकी है। दीनबंधु का, चूंकि कोई पुत्र नहीं था, लेकिन उनकी बेटी भगवानी देवी के पति डूमरंखा निवासी चौ. नेकी राम तहसीलदार भी सर्विस से रिटायर होने पर राजनीति में आए और 1968 से 1972 तक हरियाणा के राजस्व मंत्री रहे। इसके बाद उनके पुत्र व दीनबंधु के दौहते विरेन्द्र सिंह सक्रिय राजनीति में है तथा वर्तमान में हरियाणा सरकार के वित्त मंत्री रह चुके हैं, जिन्हें हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में इनैलो सुप्रीमों औम प्रकाश चौटाला ने लगभग 600 मतों से हराया है। चौ. मातू राम 1920 में आलौठ निवासी चौ. लाल चंद से चुनाव तो हार गये थे, लेकिन चुनाव याचिका में उन्होंने चौ. लाल चंद को हरा दिया और मातू राम स्वयं कभी चुनाव नहीं जीत पाये, लेकिन उनके पुत्र रणवीर सिंह विधानसभा के सदस्य व संयुक्त पंजाब में सिंचाई व बिजली मंत्री रहे। 1972 में उनके बड़े बेटे कप्तान प्रताप सिंह किलोई से चुनाव हारे। उनके बाद छोटे पुत्र भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, हालांकि विधानसभा का चुनाव दो बार हारे, पर लोकसभा चुनाव में रोहतक से तीन बार पूर्व उपप्रधानमंत्री चौ. देवी लाल को हराकर विजयी रहे, परन्तु वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, जबकि इनका बेटा दिपेन्द्र हुड्डा वर्तमान में लोकसभा सदस्य है। अलखपुरा के दानवीर सेठ छाजू राम लांबा स्वयं आजादी के पूर्व पंजाब कौंसिल के सदस्य रहे, फिर उनके बड़े पुत्र सजन कुमार पंजाब विधानसभा के सदस्य बने और अब उनके पौत्र पी.के चौधरी प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में एक थे। चौ. देवीलाल के पूरे परिवार की गणना दो इकाईयों में की जा सकती है। एक साहब राम और दूसरे चौ. देवीलाल परिवार की। चौ. साहब राम संयुक्त पंजाब के विधायक व एमएल. सी रहे और फिर उनके दामाद महेन्द्र सिंह लाठर सांसद रहे। चौ. साहब राम के पौत्र प्रदीप सिहाग भी राजनीति में है। साहब राम के छोटे भाई चौ. देवीलाल देशभर के उपप्रधानमंत्री के पद पर पहुंचे। उनके तीन पुत्र हरियाणा विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं, जिनमें प्रताप सिंह 1967 में विधायक बने। चौ. देवीलाल के अन्य दो बेटे चौ. ओम प्रकाश चौटाला प्रदेश के मुख्यमंत्री व राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं, जबकि रंजीत सिंह कृषि मंत्री व राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं तथा योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं। चौ. देवीलाल के पौत्र तथा चौ. ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला दो बार राजस्थान विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं तथा वर्तमान में डबवाली विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। अजय चौटाला के छोटे भाई अभय चौटाला भी विधायक रह चुके हैं तथा वर्तमान में जिला परिषद, सिरसा के चेयरमैन है। चौ. देवीलाल के एक अन्य पौत्र रवि सिंह भी राजनीति में हैं। संयुक्त पंजाब में सिंचाई व बिजली मंत्री रहे चौ. लहरी सिंह के बाद उनके भतीजे राजेन्द्र सिंह मलिक हरियाणा में कई बार विधायक व मंत्री रहे और राजेन्द्र सिंह मलिक के पुत्र हरेन्द्र सिंह मलिक सक्रिय राजनीति में हैं। इसी कड़ी में सर छोटूराम की यूनियननिस्ट पार्टी के आजादी से पहले विधायक रहे राम मोहर के पुत्र राव महावीर सिंह 1968 से 1972 तक परिवहन व पशुपाल मंत्री रहे और उनके पुत्र नरवीर सिंह बंसीलाल मंत्रीमंडल में सहकारिता मंत्री रह चुके हैं। सर छोटू राम के ही विश्वस्त साथी यासीन खान स्वंतत्रता से पूर्व यूनियनिस्ट पार्टी के विधायक रहे। इसके बाद उनके पुत्र तैयब हुसैन राजस्थान व हरियाणा के विधायक, लोकसभा सांसद रह चुके हैं और उनके छोटे पुत्र फजल हुसैन राजस्थान राजनीति में सक्रिय हैं। मेवात का ही एक अन्य सियासी घराना अहमद, खुर्शीद अहमद और अंजुमन के रूप में तीन पीढ़ी राजनीति में है। दीनबंधु के एक अन्य सहयोगी खांडा खेड़ी निवासी चौधरी सूरजमल आजादी से पूर्व यूनियनिस्ट पार्टी के विधायक व संयुक्त पंजाब में मंत्री रहे। उनके पुत्र जसवंत सिंह भी मंत्री रह चुके हैं। पानीपत के नत्थू शाह अपने समय के चर्चित नेता रहे, फिर उनके पुत्र हकुमत शाह दो बार विधायक रहे तथा उनके पौत्र बलवीर पाल शाह भी प्रदेश के परिवहन मंत्री रह चुके हैं तथा वर्तमान में भी पानीपत से विधायक हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह की पत्नी गायत्री देवी, हालांकि राजनीति में उत्तरप्रदेश में सक्रिय रही, पर उनका जन्म स्थान कुंडल (सोनीपत) हरियाणा में है। उनके भतीजे ओमप्रकाश राणा हरियाणा से विधायक रह चुके हैं। भाई-भाई बहिन भी हरियाणा की राजनीति में सक्रिय रहे। इनमें साहब राम के भाई चौ. देवीलाल, राव वीरेन्द्र सिंह की बहिन राजकुमारी सुमित्रा देवी, प्रो शेर सिंह बाघपुर निवासी के भाई ओमप्रकाश बेरी, अवतार सिंह भडाना के भाई करतार सिंह, ओम प्रकाश चौटाला, रणजीत सिंह व प्रताप सिंह भाईयों की त्रिमूर्ति, अजय चौटाला व उनके भाई अभय चौटाला, पानीपत के राठी बंधु धर्म सिंह राठी, जय सिंह राठी व धर्मपाल राठी, रहीम खान के भाई सरदार खान मोहम्मद इलियास के भाई हबीबुल्ला आदि प्रमुख उदाहरण हैं। इससे प्रमुख उदाहरण दलवीर सिंह व नेकी राम का है, जो एक साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहे। दो पीढिय़ों से, जो परिवार हरियाणा में सक्रिय है, उनके प्रमुख है स्व. चौ. दलवीर सिंह की पुत्री सुश्री शैलजा, जो केन्द्रीय मंत्री है, पूर्व मंत्री केसरा राम के बेटे मनी राम केहरवाला व उनके भतीजे ओम प्रकाश केहरवाला, पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बंसी लाल के पुत्र रणवीर महेन्द्रा, दामाद सोमवीर, पुत्रवधु किरण चौधरी (विधायक),भांजे दया नंद व पौत्री ऋुति(सांसद), राव वीरेन्द्र सिंह के बाद उनके पुत्र व राव इन्द्रजीत सिंह व राव अजित सिंह, राव अभय सिह के बाद उनके पुत्र कैप्टन अजय सिह यादव, पंडित भगवत दयाल शर्मा के बाद उनके पुत्र राजेश शर्मा व पुत्री भारती शर्मा, पूर्व मंत्री कप्तान रंजीत सिंह के बाद उनके पुत्र कंवल सिंह हरी सिंह दाबड़ा के बाद उनके पुत्र सुरजीत दाबड़ा, शमशेर सिंह सुरजेवाला पूर्व विधायक और उनके बेटे रणदीप सुरजेवाला विधायक पूर्व विधायक सुंदर सिंह के बेटे राम सिंह, पूर्व मंत्री राव बंसी सिंह के बाद उनके पुत्र राव नरेन्द्र सिंह, हरी सिंह सैनी के बाद उनके पुत्र अत्तर सिंह सैनी, अतर सिंह माढ़ी वाले के बाद उनके पुत्र नपेन्द्र सिंह आदि राजनीति में सक्रिय रूप से उतर चुके हैं। पूर्व मंत्री अजमत खान फिरोजपुर झिरका के बाद उनके पुत्र आजाद मोहम्मद, पूर्व मंत्री व सांसद रहीम खान नूंह के बाद उनके पुत्र इलियास मोहम्मद व हबीबुल्ला, स्व. जगदीश चन्द शाहबाद के बाद उनके पुत्र राम सिंह, स्व. ओम प्रकाश गर्ग के बाद उनके पुत्र पवन गर्ग, पूर्व मंत्री शिव राम वर्मा नीलोखेड़ी के बाद उनके पुत्र राजेश वर्मा, स्व. कर्नल राम प्रकाश के बाद उनकी पुत्री कान्तादेवी, पूर्व विधायक गया लाल के बाद उनके पुत्र पूर्व विधायक उदय भान, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष देव राज आनन्द के बाद उनके बड़े पुत्र बृज आनन्द, पूर्व मंत्री दल सिंह के बाद उनके पुत्र हरमिंदर सिंह, पूर्व विधायक दुलीचंद राठी पानीपत के बाद उनके तीनों विधायक पुत्र धर्म सिंह राठी, जय सिंह राठी व धर्मपाल राठी, पुत्री मंत्री गोवर्धन दास चौहान की पुत्री संतोष सारवान व पुत्र राजेन्द्र चौहान, पूर्व विधायक टेक राम मुढाल के बाद उनके भाई निहाल सिंह व उनके भतीजे जगत सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बाद उनकी पत्नी जसमा देवी, पुत्र कुलदीप व चन्द्र मोहन तथा भतीजा दूडा राम पूर्व विधायक (भजन लाल स्वयं सांसद) वर्तमान विधायक कुलदीप हैं तथा पूर्व मंत्री जसवंत सिंह चौहान राई के बाद उनके पुत्र सतपाल आदि सक्रिय राजनीति में हैं। इसके अलावा चौ. देवीलाल के पारिवारिक रिश्तेदार गणपत सिंह के पुत्र डा. केवी सिंह (पूर्व ओएसडीसीएम हरियाणा) पूर्व विधायक महंत गंगासागर के पुत्र दया सागर, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष चौ. वेद पाल के भतीजे विक्रम सिंह, केन्द्रीय कानून हंस राज भारद्वाज के बहनोई व पूर्व विधायक दया नंद शर्मा, पूर्वमंत्री शांति राठी के पुत्र विक्रम राठी, पूर्व मंत्री माडू सिंह मलिक के पुत्र भूपेन्द्र सिंह व जगजीत सिंह, पूर्व मंत्री जगदीश नेहरा के बेटे सुरेन्द्र नेहरा, पूर्व सांसद विद्या बैनीवाल के पुत्र विनोद बैनीवाल, पूर्व मुख्यमंत्री मा. हुक्म सिंह के बेटे राजवीर सिंह आदि अपनी इस पारिवारिक राजनीति की परम्परा को बरकरार रखने के लिए प्रयासरत है। इस परम्परा में छछरौल विधानसभा क्षेत्र के खान परिवार की चर्चा भी जरूरी है, यहां से मोहम्मद असलम खान दो बार विधायक बने और फिर उनके पुत्र मोहम्मद अकरम खान को विधायकी का अवसर मिला। हिसार के बलवंत राय तायल व बलदेव तायल भी एक ही पारिवारिक परम्परा के है। इस संदर्भ में हरियाणा मं कई ऐसे परिवार है, जहां पति के बाद पत्नी ने पारिवारिक परम्परा को आगे बढ़ाया इस प्रकरण में उल्लेखनीय नाम है, पूर्व विधायक कुंवर गुरदित सिंह की पत्नी शारदा रानी कंवर, मेजर अमीर सिंह की पत्नी लज्जा रानी, पूर्व विधायक जगदीश चन्द्र की पत्नी शन्नो देवी, पूर्व विधायक राम किशन आजाद की पत्नी शीला आजाद कर्नल सिंह की पत्नी शारदा रानी पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल की पत्नी जसमा देवी, पूर्व विधायक जगदीश बैनीवाल की पत्नी विद्या बैनीवाल, पूर्व मंत्री स्व. सुरेन्द्र सिंह की पत्नी किरण चौधरी, पूर्व मंत्री स्व. ओपी. जिन्दल की पत्नी सावित्री जिंदल पूर्व मंत्री मेहता लीला कृष्ण की पुत्रवधू स्वतंत्र बाला इत्यादि एक ही परिवार के दो सदस्यों द्वारा एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लडऩे के उदाहरण हरियाणा में हैं। 1991 में स्व. गोवर्धन दास चौहान की पुत्री संतोष सारवान तथा उसके सगे भाई राजेन्द्र चौहान ने डबवाली विधानसभा से एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ें। इसी चुनाव में बहादुरगढ़ क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सुरजमल के खिलाफ उनके सगे भतीजे महावीर सिंह ने बतौर आजाद उम्मदीवार चुनाव लड़ा। 1996 में हथीन क्षेत्र से पूर्व विधायक भगवान सहाय रावत के विरूद्ध उसकी सगी बहिन दया रावत ने चुनाव लड़ा। इसी चुनाव में किलोई से कृष्ण मूर्ति हुड्डा को उसके चचेरे भाई ने चुनावी चुनोती दी। वर्ष 2004 में ऐलनाबाद क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी मनी राम केहरवाला को उसके सगे भतीजे ओमप्रकाश केहरवाला की बगावत का सामना करना पड़ा। स्पष्ट है कि हरियाणा की राजनीति में परिवारवाद भाई भतीजेवाद, पुत्र पुत्री व दामादवाद बहुत हावी रहा और कुछ गिने चुने परिवार ही सामंतवादी परम्परा अपनाकर यहां की राजनीति में अपना वर्चस्व कायम करते रहे हैं। सत्य तो यह है कि हरियाणा की राजनीति कुद चुनिन्दा घरानों तक ही सीमित होकर रह गई। हरियाणा की राजनीति में स्व. चौ. देवीलाल के परिवार की महिलाएं अभी तक राजनीति के कोसो दूर हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल व बंसीलाल के परिवार की महिलाएं राजनीति में सक्रिय देखी जा सकती है। -चन्द्र मोहन ग्रोवर (प्रैसवार्ता)

Wednesday, December 2, 2009

महात्मा गांधी का राशन कार्ड

हैदराबाद(प्रैसवार्ता) जी हां, यह सत्य है कि आंध्र प्रदेश के सरकारी तंत्र ने महात्मा गांधी के नाम पर एक राशन कार्ड जारी किया है, जिसमें बकायदा महात्मा गांधी की फोटो लगी हुई है। चौकाने वाली बात यह है कि उस राशनकार्ड में गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गौडसे का नाम उनके पिता के रूप में लिखा गया है। फर्जी राशन कार्डों का पता लगाने के लिए चिंतूर जिले में चलाये गए एक अभियान के दौरान इस कार्ड के सामने आने पर जिला प्रशासन हरकत में आया है और इसकी जांच के आदेश दिये। यह राशन कार्ड चिंतूर जिले के राम चन्द्र पुरम पंडल के चित्रागुढां ग्राम में जारी किया गया था, जिस पर महात्मा गांधी का चित्र लगा है और उनका नाम एम. के.गांधी थाटा (तेलगू भाषा में दादा), आयु 65 वर्ष, पिता का नाम गौडसे, पता 15-46541 गांधी स्ट्रीट, गांधी रोड लिखा है। यह पता उचित मूल्य की एक दुकान का है।

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