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Friday, February 26, 2010

पर्यटकों की पसंद बन रहा है-उत्तराखंड

ऋषिकेश(प्रैसवार्ता) प्रथम मार्च 2010 से ऋषिकेश में आयोजित होने वाला इंटरनैशनल योगा सप्ताह हरिद्वार कुंभ मेले के साथ एक बोनस होगा। योगा के प्रचार के उद्देश्य से आयोजित इस मेले में पर्यटन विभाग उत्तराखंड की विशेष भूमिका रहेगी। उत्तराखंड पर्यटन के प्रशासन प्रबंधक एस.एस.राणा ने ''प्रैसवार्ता" को बताया कि धार्मिक स्थल ऋषिकेश विश्व भर के सैलानी वर्ग के आकर्षण का केन्द्र बनता जा रहा है। हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री तथा हेमकुंट साहिब जेसे धार्मिक संस्थाओं के करीब ऋषिकेश को उत्तराखंड पर्यटन द्वारा एक नई दिशा प्रदान की गई है। पूरे विश्व के योग और मैडीटेशन विशेषज्ञ रिशीकेश में पहुंचकर उत्तराखंड की अन्तरर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित होगी। श्री राणा के अनुसार इस वर्ष आयोजित होने वाले इंडिया ट्रैवल मार्किट में उत्तराखंड पर्यटन ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है, जहां उनके पैवेलियन में कुंभ मेले की झलक साफ नजर आती है-जबकि सरकारी पर्यटन विभाग, गढ़वाल विकास मंडल और कुंमाऊ मंडल विकास निगम सैलानियों को विशेषकर तीर्थ यात्रियों को विभिन्न-विभिन्न पैकेज ऑफर कर रहा है। उत्तराखंड पर्यटन द्वारा योगा पैकेज का मूल्य मात्र डेढ़ हजार रुपया है, जिसमें दो रात्री और तीन दिन तथा साढ़े सात हजार रुपये के पैकेज में सात रात्री और आठ दिन शामिल किये गये हैं। गढ़वाल विकास निगम के जनसंपर्क अधिकारी धीरेन्द्र राणा ने ''प्रैसवार्ता" को बताया कि उत्तराखंड में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से काफी सैलानी आते हैं और दिन-प्रतिदिन सैलानियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। वाईटवाटर रिवर राफ्टिंग औली में आयोजित होने वाली सैफ इंटर गेम और कुंभ के चलते, हेमकुंट साहिब की तरफ हैलीकॉप्टर सेवाएं शुरू होने से समूचे विश्व के सिख तीर्थ-यात्रियों की संख्या को भी बढ़ावा मिला है। 28 अप्रैल को समाप्त होने वाले कुंभ मेले में हिन्दु-रीतियों और धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजनों में उत्तराखंड के पुख्ता इंतजाम भी एक विशेष पहचान बनते जा रहे हैं। 9 नवम्बर 2000 को भारत के मानचित्र पर बतौर उत्तराखंड अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने वाले इस राज्य ने पर्यटन क्षेत्र में प्रशंसनीय उपलब्धि दर्ज की है। राज्य में पर्यटन विभाग के विभिन्न-विभिन्न आयाम है, जिनमें ऐडवैंचर टूरिजम,धार्मिक स्थल, पाईल्ड लाईफ टूरिजम इत्यादि विशेष हैं। राजय में आने वाले पर्यटकों की गढ़वाल विकास मंडल तथा कुमाऊं मंडल विकास निगम के 130 होटलों द्वारा मेजबानी की जा रही है।

हरियाणा सरकार की मीडिया पॉलिसी

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) हरियाणा सरकार द्वारा पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए 29 दिसंबर 2006 को पहली मीडिया पॉलिसी में 22 घोषणा की थी, जिसमें से लगभग 5 वर्ष के समय में 50 प्रतिशत पर ही अमलीजामा पहनाया जा चुका है-जबकि शेष सरकारी तंत्र की असहयोगानात्मक रवैये के चलते ठंडे बस्ते में है। राज्य सरकार द्वारा क्रियाविन्त घोषणाओं में पत्रकारों को ''हरियाणा प्रैस मान्यता नियम-2007" के अन्र्तगत अधिस्वीकृत करने की सुविधा, 50 लाख रुपये की पूंजीगत राशि से पत्रकारों की सहायता के लिए ''हरियाणा पत्रकार कल्याण कोष" गठित पत्रकारों की सामुदायिक दुर्घटना बीमा राशी एक लाख से बढ़ाकर अढ़ाई लाख रुपये करने, अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा की सीमा 2500 कि.मी. से बढ़ाकर 4000 कि.मी. करने, ब्लॉक स्तर पर पत्रकारों को अधिस्वीकृत करने, जिला मुख्यालयों से प्रकाशित सांध्य दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक व मासिक समाचार पत्रों व पत्रिकाओं के एक-एक संपादक/संवाददाता व प्रैस फोटोग्राफर को अधिस्वीकृत करना, राज्य सरकार द्वारा जारी विज्ञापनदरों में तीन गुणा वृद्धि, लघु समाचार पत्रों के सम्पादकों को अधिस्वीकृत किये जाने के लिए आर.एन.आई. के प्रसार संख्या प्रमाण पत्र व पुलिसिया जांच की शर्त हटाना, राज्य मुख्यालय पर एक समाचार पत्र के तीन पत्रकारों व दो छायाकारों तथा जिला मुख्यालय पर दो पत्रकारों व छायाकार को प्रैस मान्यता प्रदान करने का प्रावधान, दिल्ली से प्रकाशित समाचार व न्यूज एजेंसी के दो-दो प्रतिनिधियों को मान्यता तथा हरियाणा हाऊसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित आवासों में मान्यता प्राप्त पत्रकारों का डेढ़ प्रतिशत आरक्षण इत्यादि शामिल है-जबकि पिछले पांच वर्ष से लम्बित घोषणाएं-जिनमें से हरियाणा में मंडल जिला मुख्यालयों पर प्रैस भवन व मीडिया सैंटर बनाने हेतु नि:शुल्क जमीन लीज पर देने व भवन बनाने हेतु मैंचिंग ग्रांट सहित अन्य सुविधाएं (घोषणाएं 21 जून 2007), पत्रकारिता क्षेत्र में मूल रूप से कार्यरत पत्रकारों को ''हरियाणा पत्रकार कल्याण कोष" से वित्तीय सहायता, चाहे वह मान्यता प्राप्त है या नहीं (घोषणा 18 नवम्बर 2008), हरियाणा सरकार द्वारा हर वर्ष 16 नवम्बर को ''प्रैस दिवस" के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन और करीब 53 लाख रुपये के पुरस्कार पत्रकारों को दिये जाने, जिसमें राज्य स्तर पर एक-एक लाख रुपये के दो विशेष पुरस्कार, 51-51 हजार रुपये के 11 तथा 21-21 हजार रुपये 147 राज्य स्तरीय पुरस्कार शामिल हैं (घोषणा 29 दिसंबर 2006 तथा 18 नवम्बर 2008), पत्रकारिता के लिए समर्पित पत्रकारों के लिए पैंशन योजना लागू करना (घोषणा 12 दिसंबर 2008), प्रैस मान्यता संबंधी केसों का निपटारा 2 सप्ताह के अंदर करने (घोषणा 13 जनवरी 2008), पत्रकारों को इलैक्ट्रोनिक लाकर्स उपलब्ध करवाने तथा डाटा रखने के लिए एक जी.बी. स्पेस देना (घोषणा 18 नवम्बर 2008), राज्य स्तर पर पत्रकारों को विभिन्न प्रकार की वाहन जैसी सुविधाएं प्रदान करने के लिए पांच लाख रुपये की राशी (घोषणा 13 जनवरी 2008), पत्रकारों को सरकारी आवास किराये पर उपलब्ध करवाकर सरकारी कर्मचारिों की तर्ज पर न्यूनतम किराया अदायगी (घोषणा 18 नवम्बर 2008), हर जिला स्तर पर पत्रकारों की सहायता के लिए जिला लोक संपर्क अधिकारी के पास एक लाख रुपये के कोष का गठन, (घोषणा 13 जनवरी 2008), हरियाणा में प्रैस मान्यता प्रकोष्ठ एवं प्रैस सुविधा प्रकोष्ठ अलग-अलग प्रथम जनवरी 2009 से शुरू होने (घोषणा 18 नवम्बर 2008) तथा पत्रकारों के लिए लाईफ टाईम अचीवमैंट एवार्ड शुरू करने, पत्रकारिता में पूर्णतया समर्पित पत्रकारों को लाईफ टाईम अचीवमैंट अवार्ड देने, जिसमें एक लाख 51 हजार रुपये की राशी प्रदान की जायेगी (घोषणा 13 जनवरी 2008) इत्यादि शामिल हैं।

करीब 1300 कालोनियां हरियाणा में होगी-वैध

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) हरियाणा सरकार द्वारा अवैध कालोनियों को नियमित किये जाने से राज्य में चल रहे सर्वे अभियान से करीब 1300 अवैध कालोनियों को राज्य सरकार द्वारा वैध किया जा रहा है। स्थानीय निकाय विभाग के सूत्रों मुताबिक उन अवैध कालोनियों को नियमित किया जायेगा, जिसमें 50 प्रतिात से ज्यादा निर्माण हो चुका है। जिक्रयोग है कि मुख्यमंत्री हरियाणा भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने पिछले वर्ष विधानसभा भंग करने से पूर्व इन कालोनियों को वैध किये जाने की घोषणा की थी तथा मुख्यमंत्री की इस घोषणा की मंत्रीमंडल की बैठक में सहमति की मोहर भी लग चुकी है।

पंजाब में अवकाश एक मार्च को

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) पंजाब सरकार ने होली का अवकाश प्रथम मार्च को करने की घोषणा की है। इस संबंध में राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने सार्वजनिक अवकाश संबंधी जारी किये गये नोटिफिकेशन में संशोधन करके 28 फरवरी रविवार को होली पर्व पर होने वाली सार्वजनिक छुट्टी एक मार्च को कर दी है।

5 बेटियों को बनाया कबड्डी खिलाड़ी

कैथल(प्रैसवार्ता) हरियाणा राज्य के कैथल जनपद के ग्राम ढींग के रणधीर सिंह ने अपनी पांच बेटियों को कबड्डी खिलाड़ी बनाकर लड़कियों को बोझ समझने वालों के लिए अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। अपनी पांचों बेटियों की इस उपलब्धि पर नाज करने वाले रणधीर सिंह ने ''प्रैसवार्ता" को बताया कि उनकी पांचों बेटियां कबड्डी की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में न सिर्फ भाग ले चुकी हैं, बल्कि एक बेटी देश की टीम की कमान भी संभाल चुकी है। वर्ष 2009 में फरीदाबाद में हुई कबड्डी की अतंरर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता, जिसमें पाकिस्तान, नेपाल, भूटान आदि देशों की टीमों ने भाग लिया था, में बड़ी बेटी रीना के नेतृत्व वाली टीम को प्रथम स्थान मिला था-जबकि दिसम्बर 2008 को जम्मू में हुई राष्ट्रीय स्पर्धा में रीना ने हरियाणा की टीम का नेतृत्व किया था। रीना की छोटी बहिनें कुसुम, मनीषा, सुमित राष्ट्र स्तर पर हरियाणा की ओर से कबड्डी प्रतियोगिताओं में भाग ले रही है-जबकि सबसे छोटी बेटी आरती जिला स्तर पर खेल रही है। अपनी बेटियों को शिक्षा तथा खेल कूद में प्रोत्साहित करने में रणधीर सिंह और उनकी धर्म पत्नी का पूरा-पूरा सहयोग बराबर मिल रहा है। कबड्डी के स्वयं खिलाड़ी रहे रणधीर सिंह ने प्रांतीय या राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता में कभी भाग नहीं लिया, बल्कि आसपास के ग्रामों में जरूर कबड्डी खेल चुके हैं।

Monday, February 15, 2010

हरियाणा में किराएदारों पर शिकंजा कसने को जल्द बनेगा कानून

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) हरियाणा के मकान मालिकों के लिए खुशखबरी है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा किराया एवं निष्कासन नियंत्रण अधिनियम बनाया जा रहा है। इस व्याप्क कानून को लागू करने के लिए एक बिल का प्रारूप तैयार किया जा चुका है। जिसे विधानसभा में मंजूरी दी जाएगी। यह कानून सभी शहरी क्षेत्रों पर लागू होगा। नए अधिनियम की विशेषताओं के अनुसार किराएदार के निष्कासन के लिए किराएदारी अवधि की समाप्ति को आधार के रूप में शामिल किया गया है। यह अधिनियम हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, आवास बोर्ड तथा लाईसैंसशुदा कालोनियों तथा नगर एवं ग्राम आयोजन विभाग द्वारा अधिसूचित अन्य नियंत्रित क्षेत्रों पर लागू होगा। अधिनियम के मुताबिक मूल किराए में प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान किया गया है तथा प्रत्येक पांच वर्ष के उपरांत वार्षिक वृद्धि का मूल किराए में विलय कर दिया जाएगा। किराएदार के माता-पिता, विधवा, नाबालिग बच्चे, अविवाहित व्यक्ति, विधवा बेटी या तलाकशुदा बेटी एवं विकलांग बच्चों के मामले में किराएदारों के उत्तराधिकार की सीमा पांच वर्ष होगी। अन्य मामलों में यह सीमा दो वर्ष निर्धारित की गई है। यदि किराएदार मकान मालिक की सहमति के बिना किराएदारी की सहमत अवधि के बाद या प्राधिकरण द्वारा निष्कासन आदेश जारी किए जाने के बाद भी मकान में रहता है। तो उसे अनाधिकृत कब्जे की अवधि के लिए मूल किराया राशि से दोगुना राशि का भुगतान करना होगा। मकान मालिक तथा किराएदार के बीच कोई भी आपसी लिखित समझौता या अनुबंध इस नियम के तहत पार्टियों के अधिकारों को मजबूत करेगा। अद्ध सैन्य बालों के सदस्यों, विधवाओं, नाबालिग बच्चों एवं विकलांग व्यक्तियों को शामिल करने के लिए निर्दिष्ट मकान मालिक की परिभाषा का विस्तार किया गया है। निर्दिष्ट मकान मालिक जैसे कि कर्मचारी, सशस्त्र एव अद्र्ध सैन्य बलों के सदस्य अपनी सेवानिवृत्ति की तिथि से दो वर्ष पहले या बाद में निष्कासन प्रक्रिया शुरू करने के पात्र होंगे।

भाषा के नाम पर तोड़े नहीं जोड़ें: राज्यपाल

बठिंडा(प्रैसवार्ता) भाषा के नाम पर लोगों को आपस में तोडऩा नहीं चाहिए, बल्कि जोडऩा चाहिए। परन्तु कुछ लोग जनता को भाषा के नाम पर लड़ा रहे हैं। यह बात पंजाब के राज्यपाल शिवराज पाटिल ने राजिंद्र कालेज में लगाए चार दिवसीय अरोग्य मेले के तीसरे दिन आयोजित समारोह में कही। उन्होंने कहा कि हमारे देश के प्रांतों की अलग-अलग परंपराएं हैं, जिनका अपना-अपना महत्व है। हमें सभी का सम्मान करना चाहिए। इससे एकता बढ़ाने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा हमारी संस्कृति व पद्धति के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सा का अपना महत्व है। हमें दूसरी चिकित्सा प्रणालियों का विरोध नहीं करना चाहिए। पाटिल ने कहा कि केंद्र सरकार ने ऐसे मेले लगाने के लिए नीति बनाई व धन का प्रबंध भी किया है। परन्तु सभी प्रांत इसका लाभ नहीं उठा रहे। पंजाब बधाई का पात्र है, जो इस योजना का लाभ ले सका। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान व संस्कृति हमारे देश में हजारों वर्षों से हैं। राज्यपाल ने कहा कि हमारी पुरानी पद्धति को नए ढंग से पेश करने की जरूरत है। ताकि प्रत्येक व्यक्ति इसे समझ सके। इससे पहले पंतजलि योग समिति हरिद्वार के वैद्यराज आचार्य बाल कृष्ण जी ने बताया कि आधुनिक व आपात स्थिति में एलोपैथी का अपना महत्व है। हमारे ऋषि-मुनियों ने पीपल, तुलसी व अन्य पौधों को धार्मिक परंपरा से इसलिए, जोड़ा था ताकि वह नष्ट ना हों क्योंकि उन पौधों से हमें जीवन रक्षक दवाईयां मिलती हैं। व्रत स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, इसे भी धार्मिक रीति से जोड़ा गया। स्वामी रामदेव ने योग का प्रचार घर-घर पहुंचा कर करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य लाभ दिया है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा हमें अपने चरित्र व इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए। हमने कीटनाशक औषधियों व रासायनिक खादों का प्रयोग कर धरती को जहरीला बना दिया, इसे बचाने की जरूरत है। पंजाब की स्वास्थ्य मंत्री लक्ष्मी कांता चावला ने कहा कि राज्य में यह तीसरा अरोग्य मेला है। चौथा मेला अक्टूबर में होगा।

Thursday, February 11, 2010

डासिंग ब्यूटी श्रद्धा शर्मा 'जीवा ' में

श्रद्धा इस समय दक्षिण की फिल्मों में व्यस्त है वहां की फिल्मों में वह डांसिंग ब्यूटी कहलाने लगी है। अभी हाल ही में उनकी रिलीज कन्नड फिल्म जीवा में उनके ग्लैमर गाने ने लगभग सिनेमाघर के पर्दे पर आग ही लगा दी है। गाने को फिल्माने के लिए निर्माता देवकुमार ने पैसा बीयर की तरह बहाया है क्योंकि इस गानें के सेट को सजाने के लिए डांस डायरेक्टर की मांग पर आर्ट डायरेक्टर ने सेट पर चालीस हजार बीयर की बाटलों का उपयोग किया है। फिल्म के हीरो हैं प्रजवल देवराज जिनके साथ श्रद्धा काम कर रही है फिल्म के इस गानें की चर्चा लिम्का वल्र्ड रिकार्ड में भी हो रही है। फिल्म की सफलता को देखकर फिल्म के निर्माता अब इसे हिन्दी में भी बनाने की योजना बना रहे है। इस फिल्म में जिस गानें के बोलों पर श्रद्धा ने डांस किया है उसके बोलों के अनुसार श्रद्धा की खूबसूरती बरक ओबामा की ताकत से ज्यादा है तथा उसका हुस्न ओसामा से भी खतरनाक है लगी रहो श्रद्धा जी अपना हुस्न का जादू बिखरने को हम तो बस इस फिल्म का हिन्दी में आने का इन्तजार करेंगे अथवा इस गाने को यू ट्रयूब पर देख कर आहें भरते रहेंगे । प्रस्तुति: अशोक भाटिया (प्रैसवार्ता)

Wednesday, February 10, 2010

महंगाई की तेज धार,सभी बेकरार

केन्द्र सरकार के घोषित तमाम प्रयासों के वावयूद भी महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही है। दिन पर दिन बाजार में खाद्य पदार्थो के दाम बढ़ते ही जा रहे है। ऐसा लगने लगा है कि बाजार पर सरकार का अब कोई नियंत्रण ही नहीं रहा। इस बढ़ती जा रही महंगाई के लिए केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को दोषी ठहरा रही तो राज्य सरकार केन्द्र को, आखिर इस तरह के परिवेश के लिए दोषी कौन है ? देश की आम जनता इस तरह के विवाद में न उलझकर, सीधे तौर पर महंगाई से निजात पाना चाहती हैं। केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार, आज बाजार सभी के नियंत्रण से बाहर होता दिखाई दे रहा है, तभी तो महंगाई घटने के बजाय दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। एक तरफ केन्द्र सरकार के आम बजट की चर्चा है तो दूसरी ओर बजट पूर्व पेट्रोलियम पदार्थो की कीमत में वृद्धि किये जाने की वकालत है। इस तरह के प्रारुप पूर्व में भी उभरते रहे है ,जहां बजट पूर्व ही कुछ सामानों के दाम में वृद्धि कर दी जाती है तथा विरोध के बाद बजट में की गई वृद्धि में कुछ कमी कर दी जाती है। इस तरह के दोहरेपन की नीति अपनाकर सरकार सभी को खुश करने का प्रयास करती है। जो केवल सरकार का आम जन के प्रति मात्र छलावा का उभरता स्वरुप है। केन्द्र सरकार ने बजट पूर्व रशोई गैस सिलेंडर की कीमत में 100रु. बढ़ाने के साथ - साथ पेट्रोलियम की कीमत में भी वृद्धि किये जाने की संभावना व्यक्त कर जनमानस के बीच एक हलचल पैदा कर दी है। महंगाई तो पहले से ही काफी बढ़ी हुई है, कम होने का नाम ही नहीं ले रही है, और इधर महंगाई पर चिंतन जारी है। सम्मेलन पर सम्मेलन हो रहे है पर परिणाम शून्य। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का क्रम जारी है। आखिर महंगाई किस तरह नियंत्रित होगी ,इस प्रश्न पर प्राय: सभी मौन है । पक्ष विपक्ष इस मुद्दे पर एक जैसे हो गये है। जमाखोरों मुनाफाखोरों का मनोबल दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है । जिसके कारण बाजार अनियंत्रित हो चले है। जहां गरीब का जीना दुर्भर हो गया है। अमीर एवं गरीब के बीच का फासला पहले से काफी बढ़ चला है । अमीर और अमीर होता जा रहा है तो गरीब और ज्यादा गरीब। गरीब को राहत देने के नाम पर केन्द्र एवं राज्य सरकारों के बीच तरह तरह की योजनाओं के माध्यम से प्रतिस्पद्र्धा का दौर जहां जारी है वहीं महंगाई को कम करने का सार्थक प्रयास कहीं नजर नहीं आता। जिसे मात्र छलावा ही कहा जा सकता है। इस तरह के उभरते परिवेश में देश का मध्यमवर्गीय सबसे ज्यादा परेशान देखा जा सकता है। जहां ऐसे वेतनभोगी लोगों की संख्या बहुत ही कम है, जो आज के बाजार का सामना कर सके। इस तरह के लोगों की दिनचर्या के आधार पर यहां के आम आदमी के जीवन की दिनचर्या की तुलना कभी भी नहीं की जा सकती। आज भी देश की अधिकांश आबादी अल्प वेतनभोगी है जो आज के बाजार में कतई टिक नहीं सकती। वैसे भी वेतनभोगी का वेतन जिस अनुपात में बढ़ता दिखाई देता, बाजार भाव कई गुणा बढ़ जाता है तथा सहन सभी को करना पड़ता है। इधर सरकार द्वारा आम बजट से पूर्व ही पेट्रोलियम पदार्थ में की जाने वाली वृद्धि का भी सीधा प्रभाव बाजार पर ही पड़ता है जिससे सामानों के दाम और बढ़ जाते है। आज बढ़ती जा रही महंगाई से सभी परेशान है। दाल , सब्जी, आनाज के भाव आसमान छूने लगे है। इस बढ़ते भाव के आगे हर तरह की कमाई अब छोटी लगने लगी है। एक समय ऐसा था कि संकट काल में आम आदमी दाल- रोटी खाकर अपना गुजारा कर लेता था और आज जब दाल ही 100रु. के करीब हो चली है जो आम आदमी कैसे वसर कर सकेगाा , विचार किया जा सकता है। आज ऐसा कोई सामान नहीं जिसपर सरकार टैक्स नहीं लेती हो। सामान उत्पादन से लेकर बाजार एवं आम आदमी तक पहुंचने तक टैक्स बार बार देना पड़ता है । यह भी महंगाई बढऩे का एक प्रमुख कारण हैं जिसे प्राय: नगण्य समझा जाता है। दिन पर दिन बढ़़ते जा रहे नये नये टैक्स भार तले आम जन जीवन दबता जा रहा हैं। जनप्रतिधियों का बदला स्वरुप जहां आज ये जन नेता न होकर राजनेता हो चले है , जिनकी सुख सुविधाएं दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। ये आज की महंगाई में चार चांद लगा रहे है । जहां बढ़ती जा रही महंगाई के प्रति यदि सही मायने में उन्हें जरा सी भी चिन्ता होती तो देश में नये नये टैक्स का स्वरुप उभर कर सामने नहीं आता , जिनपर इन सबकी सुख सुविधाएं निर्भर होती है। आज की बढ़ती जा रही महंगाई से निजात पाने के लिये सबसे पहले जरूरी है कि बढ़ते हुए टैक्स के दर को कम किया जाय । बाजार को मुनाफखोरों के चंगुल से बचाया जायं। सरकारी तौर पर सामानों के भाव बढऩे की कभी घोषणएं न की जाय । वेतन के अनुपात को बाजार भाव के अनुरुप इस तरह रखा जाय जिससे बाजार भाव पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। हर स्तर पर अनावश्यक खर्च में कटौती की जाय । एक दूसरे पर दोषारोपड़ की प्रकिया को रोककर बढ़ती जा रही महंगाई को रोके जाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाय। तभी महंगाई की तेज धार से सभी को बचाया जा सकता है। डॉ. भरत मिश्र प्राची(प्रैसवार्ता)

Monday, February 8, 2010

सभी के लिए सूचना का अधिकार

सूचना का अधिकार भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त हथियार बन कर सामनें आया है, लेकिन दूर-दराज के गावों में आज भी ग्रामीण इस अधिकार से वंचित हैं। उनकी सोच में अधिकारी उनकी सूचनाओं को देने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसा नहीं है सूचना के इस अधिकार ने आम आदमी को संसद विधायिका के बराबर का अधिकार दे दिया है। यदि आपने कोई शिकायत की है और उस पर क्या कार्यवायी हुई ? इसे जानने के लिए सूचना के अधिकार 2005 के तहत सूचना मांगी जा सकती है। सूचना प्राप्त करनें हेतु, सूचना चाहने वाले को निर्धारित शुल्क रुपये 10 ट्रेजरी चालान, पोस्टल आर्डर अथवा बैक ड्राफ्ट के साथ जन सूचना अधिकारी को आवेदन करना होता है, बी0पी0एल0 कार्ड धारक को केवल कार्ड की फोटोस्टेट प्रति लगानी होती है। आवेदक द्वारा मांगी गयी सूचना 30 दिन के अन्दर उपलब्ध कराना आवश्यक है। साथ ही आवेदक को यह भी बताने की आवश्यकता नहीं है कि उसे यह सूचना क्यों चाहिए। यदि आवेदक किसी ऐसे कार्यालय को सूचना का आवेदन देता है जहां वह सूचना उपलब्ध नहीं है तो वह कार्यालय भी उसका आवेदन-पत्र वापिस नहीं करेगा अपितु सही कार्यालय को आवेदक का आवेदन-पत्र प्रषित कर देगा। यदि विभाग का सूचना अधिकारी 30 दिन के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराता है ता इसकी शिकायत मुख्य सूचना आयुक्त उ0प्र0 राज्य सूचना आयोग छटा तल, इंदिरा भवन लखनउ से की जा सकती है। निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध न कराना सूचना के अधिकार 2005 के कानून के तहत अपराध माना गया है। जिसके लिए दोषी अधिकारी पर रुपये 250 प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम रुपये 25000 का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यह जुर्माना दोषी अधिकारी को अपनी जेब से भरना होगा। -सत्यवीर सिंह (प्रैसवार्ता)

हुड्डा सरकार पर संकट के बादल

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरमोहिन्द्र सिंह द्वारा हजकां के पांच विधायकों को कांग्रेस में शामिल करने उपरांत उन्हें अंतिम नोटिस दिये जाने से सत्तारूढ़ हुड्डा सरकार पर संकट के बादल मंडराते दिखाई देने लगे हैं। हजकां विधायकों को जल्दबाजी में हजकां से बगावत करने वाले विधायकों को कानूनी विचार-विमर्श के बगैर कांग्रेस में शामिल किया जाता, तो वह यह विधायक हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जारी पहले नोटिस का ही जवाब दे देते। नोटिस से हजकां विधायकों की दूरी से संकेत मिलता है कि प्रदेश में एक साथ पांच उपचुनाव किसी भी समय हो सकते हैं।

हरियाणा-महंगाई की मार-शराबियों को भी

चंडीगढ़(प्रैसवार्ता) दैनिक रोजमर्रा की वस्तुएं तो पहले ही आसमान छू रही हैं और अब शराब के शौकीनों पर महंगाई का असर देने को मिलेगा। हरियाणा सरकार की नई शराब नीति और लाईसैंस फीस की बढ़ौत्तरी के चलते शराब ठेका का चलाना मुश्किल भरा होगा। ''प्रैसवार्ता'' द्वारा एकत्रित की गई जानकारी मुताबिक शराब के दाम 15 प्रतिशत और बीयर 20 प्रतिशत तक महंगी हो सकती है। सरकार ने देसी शराब के लाईसैंस की फीस में 10 प्रतिशत तथा अंग्रेजी शराब की फीस में 5 प्रतिशत वृद्धि की है-जबकि गुडग़ांव मंडल में अंग्रेजी शराब के ठेकों पर 8 प्रतिशत बढ़ाई गई है। शराब के ठेकेदारों का कहना है कि यदि सरकार न्यूनतम मूल्य से कम शराब बेचने वालों पर शिकंजा कसे, तो ठेकेदार भले ही कारोबार कर पायें, अन्यथा सरकार की आबकारी नीति, जहां शराब के शौकीन लोगों के साथ-साथ शराब के ठेकेदारों को किसी आर्थिक झटके से कम नहीं आंकी जायेगी, वहीं सरकार के लिए कई परेशानियां खड़ी कर सकती है। सरकार के इस निर्णय से देसी शराब की बोतल का न्यूनतम मूल्य 75 रुपये हो जायेगा, वहीं सैमीडीलैक्स शराब (रायल स्टैग, रैड नाईट) 250 रुपये तथा रैगुलर ब्रांड (ऐरीस्ट्रोकेट, डायरैक्टर स्पैशल, व्हाईट हाऊस, आफिसर चवॉयस)इत्यादि का न्यूनतम मूल्य 170 रुपये प्रति बोतल कर दिया गया है। शराब के ठेकेदारों के अनुसार यदि सरकार अवैध तथा सरकारी की शराब पर प्रतिबंध लगाने में कामयाब हो जाती है, तो सरकार की आबकारी नीति कामयाब हो सकती है, अन्यथा शराबबंदी योजना की तरह सरकार को आबकारी नीति को लेकर किए गये संशोधन में बदलाव लाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

नम्बर वन हरियाणा-जहां उपलब्ध है-नकली दूध, दही, पनीर, क्रीम, सौन्दर्य प्रसाधन, हल्दी-मिर्च मसाले, पैट्रोल, जीवन-रक्षक दवाईयां, बीज, चिकित्सक, ग्रीस, खल

(चन्द्र मोहन ग्रोवर की विशेष रिपोर्ट-प्रैसवार्ता)
''देसा में देस हरियाणा, जहां दूध दही का खाना'' कहावत अब हरियाणा वासियों पर लागू नहीं होती, क्योंकि अब हरियाणा में बड़े पैमाने पर नकली दूध की वजह, दहीं, क्रीम व घी बिक रहा है। आक्सीटोसिन के टीकों से पशुओं का शोषण करके धीमी गति के जहर जैसा दूध दोधी क्रीम निकालकर धड़ल्ले से बेच रहे हैं और स्प्रेटा दूध को गाढ़ा करने के लिए यूरिया तक का प्रयोग करने से भी नहीं चूकते। इस तरह का दूध और उससे बनी वस्तुएं स्वास्थ्य के लिए क्षतिदायक हैं। हरियाणा राज्य के कई शहरों में नकली घी, पनीर इत्यादि का छोटी-छोटी फैक्ट्रीज पकड़ी भी गई है, मगर प्रदेश में बिक रहे सिन्थेटिक दूध की बिक्री को नहीं रोका जा रहा। केवल इतना ही नहीं दुकानों व जनरल स्टोर सहित ब्यूटी पार्लरों में नकली सौन्दर्य प्रसाधनों की खुली बिक्री हरियाणा के हर छोटे-बड़े शहर में हो रही है, जो न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि कई रोगों को भी निमंत्रण देती है। राष्ट्रीय स्तर पर सुप्रसिद्ध ब्रांड की ''हू-ब-हू'' नकल वाले सौन्दर्य प्रसाधन दिल्ली से लाकर पूरे प्रदेश में बेचे जा रहे हैं। नकली बीज, खाद व कीटनाशक दवाईयों की बिक्री से कृषि व्यवसाय निरंतर प्रभावित हो रहा है, जिससे किसान वर्ग को आर्थिक क्षति हो रही है। कृषि पैदावार कम होने के कारण दाम बढ़े हैं-जिससे महंगाई का सामना हर व्यक्ति को करना पड़ रहा है। पैट्रोल में डीजल, नकली ग्रीस व नकली मोविल ऑयल, नकली इंजन, नकली पुर्जों की बिक्री से वाहनों को निरंतर क्षति हो रही है और वातावरण में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। चर्चा है कि कुछ पैट्रोल पम्प मालिकों ने चार-चार या इससे अधिक टैन्क भूमिगत बनाये हुए हैं, जिनमें एक-दो में शुद्ध पैट्रोल होता है और निरीक्षण की नौबत आने पर लाईन बदल पर शुद्ध पैट्रोल वाले टैंकों से सप्लाई कर दी जाती है। प्रदेश भर में ड्रग माफिया द्वारा नकली व नशीली जीवन रक्षक दवाईयों का जखीरा बहादुरगढ़, सिरसा, फतेहाबाद, डबवाली सहित कई शहरों में पकड़ा जा चुका है-जबकि राष्ट्रीय कंपनियों के लोकप्रिय ब्रांड के नाम पर नकली व मिलावटी दवाईयों की बिक्री बेरोक टोक जारी है। राज्य के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में नकली चिकित्सक अपना जाल बिछाये हुए स्वास्थ्य के साथ-साथ लोगों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। राज्य में नकली शराब की बिक्री भी होने की खबर है। शराब के ठेकेदार घटिया व मिलावटी तथा तस्करी की शराब बेच रहे हैं-जिनसे न सिर्फ शराब सेवन करने वालों को आर्थिक क्षति होती है-बल्कि उनकी आंखों व शरीर पर बुरा प्रभाव पडऩे के साथ-साथ नपुंसकता भी आ सकती है। प्रदेश में नकली हल्दी, मिर्च, मसालों की बिक्री न सिर्फ स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करती है, बल्कि कई बीमारियों की भी जन्मदाता बन रही है। नकली टैलीविजन, नकली घडिय़ां, नकली खल, नकली सी.डी. की बिक्री के साथ-साथ प्रदेश में नकली राजनेताओं की भी कमी नहीं है-जो विजयी किसी और राजनीतिक दल से होते हैं और गुणगान किसी ओर राजनीतिक दल का करते हैं। प्रात:काल चाय की चुस्कियों के साथ गुणगान किसी राजनीतिक दल का होता है और दोपहर में लंच के समय उस पर भद्दे-भद्दे आरोपों की झड़ी लगा देते हैं। सांयकाल को अपने कहे पर मुकर जाते हैं और रात्री को किसी अन्य राजनीतिक दल के नेताओं की बगल में बैठकर जनता की आशाओं और भावनाओं की खिल्ली उड़ाते हैं। इसी प्रकार राज्य में नकली डायर, नकली नम्बरों वाले वाहन, नकली संवाददाता, नकली ईंटें, नकली रंग-रोगन व चूना, नकली कारतूस, नकली ग्लूकोज, नकली चायपत्ती, नकली सीमेंट, नकली पुर्जे व नकली शर्बत इत्यादि की भी बिक्री बेरोकटोक जारी है।

कानूनी लचीलापन बढ़ रहा है-वैश्यावृत्ति का धंधा

सिरसा(हरियाणा)बठिण्डा(पंजाब)-(प्रैसवार्ता) भारत वर्ष का शायद ही कोई ऐसा महानगर या शहर होगा, जहां वैश्यावृत्ति का कारोबार बेरोकटोक न चलता हो। देश की राजधानी दिल्ली के अतिरिक्त कोलकाता, मुंबई, लखनऊ, पटना, चेन्नई, आगरा आदि ऐसे शहर हैं, जहां इस धंधे के बकायदा बाजार बने हुए हैं, जहां महिलाएं अपने देह का व्यापार करती है। हरियाणा राज्य का जिला सिरसा तथा पड़ौसी राज्य पंजाब का पड़ौसी जिला बठिण्डा इससे अछूता नहीं रहे। वैसे तो देह व्यापार एक दंडनीय अपराध है, परन्तु इस संबंध में लगने वाली कानूनी धारा ढीली है। देश के 60 वर्ष की स्वतंत्रता उपरांत भी इस सामाजिक बुराई पर अकुंश नहीं लगाया जा सका, बल्कि यह सामाजिक बुराई तीव्रता से आगे बढ़ती जा रही है। वर्तमान में तो ऐसी स्थिति हो गई है कि वैश्यावृत्ति का धंधा ग्रामीण क्षेत्रों में भी दस्तक देने लगा है। चिंता का विषय बना यह धंधा कानूनी की लचीली धारा तथा सरकारी तंत्री की संदिग्ध भूमिका की वजह से कारोबार बनता जा रहा है। बठिण्डा से सिरसा तथा सिरसा से बठिण्डा जाने वाली देह-व्यापारिनों के जगह-जगह पर अपने ठिकाने स्थापित कर लिये हैं-जबकि ब्यूटी पार्लर व शैक्षणिक संस्थाएं इस धंधे मं लिपटती जा रही हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता, कि इस धंधे को राजनेताओं तथा पुलिसिया तंत्र की सरपरस्ती हासिल है। देह व्यापार के धंधे से जुड़ी महिलाएं अक्सर बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, न्यायालय परिसर, मुख्य बाजारों में घूमती रहती हैं और रंगीन मिजाज व्यक्तियों को अपने जाल में फंसाने में तत्पर देखी जा सकती हैं। ''प्रैसवार्ता'' को मिली जानकारी अनुसार इस धंधे से जुड़ी महिलाओं का भाव उनकी आयु अनुसार होता है तथा एक रात के लिए एक हजार से पांच हजार रुपये तक लिये जाते हैं। ग्राहक कैसा है या एक से ज्यादा है, का भी मोलभाव अलग होता है। कुछ पेशेवर महिलाएं शराब सेवन के साथ-साथ कई पुरूषों से शारीरिक संबंध भी बनाने से गुरेज नहीं करती। Justify Full

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