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Wednesday, January 27, 2010

क्लोरोफार्म एक जहर:सरेआम बिकता है

सिरसा(प्रैसवार्ता) रंगहीन तरल पदार्थ और तीखी मीठी गंध वाले क्लोरोफार्म को, यदि सूंघने का प्रयास यिका जाये, तो क्लोरोफार्म का नाम सुनते ही सूंघने वाला व्यक्ति बेहोश हो जायेगा। इस कैमीकल के प्रयोग के कई ढंग हैं। कारखानों तथा प्रयोगशाला में सल्फेट की तरह इसका प्रयोग किया जाता है और प्लास्टिक बनाने वाली मशीनों में फिक्सर के तौर पर प्रयोग, न सिर्फ चिंता का विषय है, बल्कि इसका दुरुपयोग क्षतिदायक भी है। क्लोरोफार्म के जहरीले पन के कारण अप्रेशन थियेटरों में रोगियों को बेहोश करने के लिए इसका प्रयोग नहीं किया जाता। आश्चर्यजनक पहलू यह है कि, जहां क्लोरोफार्म अस्पतालों में मिलना मुश्किल है, वहीं दवा विक्रेताओं के पास आसानी से उपलब्ध हो जाता है। अपराधी प्रवृत्ति के लोगों की लोकप्रिय पसंद क्लोरोफार्म के कारण जनपद सिरसा के डबवाली शहर में लूटपाट की घटनाएं हो चुकी हैं। ''प्रैसवार्ता'' द्वारा एकत्रित जानकारी मुताबिक क्लोरोफार्म को अभी तक ''एच ग्रेड'' नहीं दिया गया। ''एच ग्रेड'' की दवाई लेने के लिए डाक्टर की पर्ची अनिवार्य होती है। इंडियन फार्म स्यूटिकल्ज ऐसोसियेशन की कम्युनिटी फार्मेसी शाखा के निर्देशक डा. संजय शर्मा के अनुसार क्लोरोफार्म का प्रयोग कारखाने तथा प्रयोगशाला तक ही होता है और ज्यादातर दवा विक्रेता इसकी बिक्री नहीं करते, परन्तु इसकी बिक्री पर कोई पाबंदी न होने के कारण खरीदा-बेचा जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के इग्जामीनर डी.वी.एस देवगौड़ा ने ''प्रैसवार्ता'' से कहा कि यह सच है कि क्लोरोफार्म की बिक्री व प्रयोग चिंताजनक है, मगर इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून में संशोधन की जरूरत है।

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